21 मौतों का जिम्मेदार कौन? 15 चालानों के बावजूद सड़क पर दौड़ती रही बस           

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October 14, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-अब चालक गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर/उमा सक्सेना/-  जम्मू-कश्मीर के रामनगर-उधमपुर मार्ग पर कघोट इलाके में हुए दर्दनाक बस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस भीषण दुर्घटना में 21 लोगों की जान चली गई, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसे के बाद अब पुलिस ने बस चालक को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन जांच में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने परिवहन व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

24 घंटे के भीतर पुलिस के हत्थे चढ़ा चालक
हादसे के बाद मौके से फरार हो गया बस चालक आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया। पुलिस ने 27 वर्षीय चालक रोहित शर्मा को तरेला इलाके से गिरफ्तार किया। आरोपी रामनगर क्षेत्र के दिहाड़ी गांव का रहने वाला है। शुरुआती जानकारी में माना जा रहा था कि चालक की भी हादसे में मौत हो गई होगी, लेकिन बाद में पता चला कि वह जिंदा है और गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपता फिर रहा था।

पुलिस ने लगातार दबिश देकर उसे 24 घंटे के भीतर पकड़ लिया। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और अब उससे हादसे के कारणों तथा बस की स्थिति को लेकर पूछताछ की जा रही है।

15 चालानों के बावजूद सड़क पर दौड़ती रही बस
जांच में सामने आया है कि जिस बस ने 21 लोगों की जान ली, उसका रिकॉर्ड पहले से ही बेहद खराब था। बीते तीन वर्षों में बस पर कुल 15 चालान किए गए थे। इनमें से 10 चालान सिर्फ ओवरलोडिंग के लिए काटे गए थे। इसके अलावा तेज रफ्तार, टैक्स रसीद न होना और नियमों की अनदेखी जैसे मामले भी सामने आए थे।

इतनी बार नियम तोड़ने के बावजूद न तो बस को जब्त किया गया और न ही चालक का लाइसेंस रद्द किया गया। परिवहन विभाग केवल चालान काटकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करता रहा और बस लगातार सड़कों पर दौड़ती रही।

चार चालानों का जुर्माना अब तक नहीं भरा गया
हैरानी की बात यह है कि 15 में से चार चालानों का भुगतान भी अब तक नहीं किया गया था। इनमें ओवरलोडिंग, टैक्स रसीद न होना और लापरवाही से वाहन चलाने जैसे गंभीर मामले शामिल थे। इसके बावजूद बस की आरसी रद्द नहीं की गई और न ही उसके संचालन पर रोक लगाई गई।

प्रशासन की यही ढिलाई अब 21 परिवारों पर भारी पड़ गई। सवाल यह उठ रहा है कि यदि समय रहते बस को सड़क से हटा दिया जाता, तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी नहीं होती।

तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग बनी मौत की वजह
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे की सबसे बड़ी वजह बस की तेज रफ्तार और उसमें क्षमता से अधिक सवारियां होना था। सोमवार सुबह बस रामनगर से उधमपुर के लिए रवाना हुई थी। जैसे ही वह कघोट इलाके के तीखे मोड़ पर पहुंची, चालक ने सामने से आ रहे छोटे वाहन को रास्ता देने के लिए बस को मोड़ने की कोशिश की।

लेकिन बस की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि चालक उस पर नियंत्रण नहीं रख सका। बस का एक पहिया सड़क से नीचे उतर गया और कुछ ही सेकंड में पूरी बस करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। गिरते समय बस कई बार पलटी और नीचे सड़क पर जा रहे एक ऑटो को भी अपनी चपेट में ले लिया।

हादसे में उजड़ गए 21 घर
इस हादसे में जिन 21 लोगों की जान गई, उनमें शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, छात्र और आम नागरिक शामिल थे। अधिकतर लोग रामनगर क्षेत्र के रहने वाले थे और रोजमर्रा के काम के लिए उधमपुर जा रहे थे।

घटना इतनी भयावह थी कि खाई में गिरते समय बस की छत पूरी तरह अलग हो गई। कई यात्री बस के नीचे दब गए, जबकि कई लोग दूर जा गिरे। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

सेना और स्थानीय लोगों ने चलाया राहत अभियान
जिस समय यह हादसा हुआ, उसी दौरान वहां से सेना का एक काफिला गुजर रहा था। हादसा देखते ही जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय ग्रामीणों ने भी सेना और पुलिस के साथ मिलकर घायलों को खाई से बाहर निकाला।

घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। ज्यादातर घायलों का इलाज जीएमसी उधमपुर में चल रहा है। कई लोगों की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।

अगर क्रैश बैरियर होते तो बच सकती थीं जानें
इस हादसे के बाद सड़क सुरक्षा को लेकर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। जिस मोड़ पर बस खाई में गिरी, वहां सड़क किनारे कोई मजबूत क्रैश बैरियर नहीं था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वहां सुरक्षा दीवार या बैरियर लगा होता, तो बस खाई में गिरने से बच सकती थी।

उधमपुर, डोडा, रामबन और किश्तवाड़ जैसे पहाड़ी इलाकों में कई सड़कें बेहद खतरनाक हैं, लेकिन वहां सुरक्षा इंतजाम अब भी अधूरे हैं। यही वजह है कि हर साल ऐसे हादसों में दर्जनों लोगों की जान चली जाती है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
यह पहला मौका नहीं है जब जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह की दुर्घटना हुई हो। नवंबर 2023 में डोडा में हुए एक बस हादसे में 39 लोगों की जान चली गई थी। वहीं इस साल की शुरुआत में डोडा में ही एक सैन्य वाहन खाई में गिर गया था, जिसमें 10 जवान शहीद हुए थे।

इन सभी हादसों में एक बात समान रही—तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और सड़क किनारे सुरक्षा उपायों का अभाव। लेकिन हर हादसे के बाद केवल जांच और बयानबाजी होती रही, जबकि जमीन पर हालात जस के तस बने रहे।

प्रशासन पर उठे सवाल
रामनगर हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि केवल चालान काटना काफी नहीं है। यदि कोई वाहन बार-बार नियम तोड़ रहा है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि जब बस पर इतने चालान हो चुके थे, तब भी उसे चलने की अनुमति क्यों दी गई? क्यों चालक का लाइसेंस रद्द नहीं हुआ? क्यों बस को जब्त नहीं किया गया? और आखिर क्यों सड़क पर सुरक्षा के लिए जरूरी बैरियर नहीं लगाए गए?

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक ऐसी त्रासदियां रुकने वाली नहीं हैं।

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