नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- डॉ. शकुंतला भरणे की मधुर आवाज़ में सजे दो नए भक्ति गीतों का गोवा के फोंडा क्षेत्र में भव्य रूप से लोकार्पण किया गया। यह कार्यक्रम महालक्ष्मी मंदिर के सभागार में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संगीत प्रेमी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। इन गीतों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति और आध्यात्मिक वातावरण के कारण कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रसिद्ध गीतकारों ने लिखे गीत
इन दोनों भक्ति गीतों के बोल गोवा के प्रसिद्ध रचनाकार माणिक राव गवणेकर और माधव बोरकर ने लिखे हैं। पहला गीत “नाम ही जप तू” है, जिसके बोल माणिक राव गवणेकर ने लिखे हैं, जबकि इसका संगीत स्वयं डॉ. शकुंतला भरणे ने तैयार किया है। दूसरा गीत “तू देवी महामाया” है, जिसे माधव बोरकर ने लिखा है और इसका संगीत दिग्गज संगीतकार दत्ता दावजेकर ने दिया है।
मंदिरों में हुई गीतों की शूटिंग
इन दोनों गीतों की शूटिंग गोवा के दो प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों श्री महालक्ष्मी संस्थान और श्री नवदुर्गा देवस्थान में की गई। मंदिरों के शांत, पवित्र और आध्यात्मिक वातावरण ने गीतों को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। वीडियो में दिखाए गए दृश्य भक्ति और भारतीय परंपरा की गहराई को बेहद सुंदर तरीके से प्रस्तुत करते हैं।
करण समर्थ ने किया निर्देशन
इन भक्ति गीतों को प्रसिद्ध निर्देशक करण समर्थ ने निर्देशित किया है। हॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुके करण समर्थ ने इस एल्बम को एक विशेष सांस्कृतिक रूप देने की कोशिश की है। उन्होंने गीतों को केवल संगीत तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनमें भारतीय अध्यात्म, परंपरा और सनातन संस्कृति की झलक भी दिखाई है।
शानदार सिनेमैटोग्राफी बनी खास आकर्षण
इन गीतों की शूटिंग मशहूर कैमरामैन सैंडी सरदेसाई ने की है। उनकी सिनेमैटोग्राफी ने मंदिरों के भव्य दृश्य, पूजा-अर्चना और धार्मिक वातावरण को बेहद खूबसूरती से कैमरे में उतारा है। हर दृश्य में भक्ति और सौंदर्य का अद्भुत मेल दिखाई देता है।
कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके निर्देशक
हालांकि गीतों के लोकार्पण समारोह में निर्देशक करण समर्थ शामिल नहीं हो सके। बताया गया कि वह इन दिनों दिल्ली में अपनी नई फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं। इसके बावजूद कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुति और निर्देशन की जमकर सराहना हुई।
महाभारत के कोंकणी अनुवाद कार्यक्रम से जुड़ा आयोजन
यह भक्ति गीतों का लोकार्पण कार्यक्रम केवल संगीत तक सीमित नहीं था। यह आयोजन महाभारत के कोंकणी अनुवाद पुस्तक के विमोचन समारोह का भी हिस्सा था, जिसे माणिक राव गवणेकर ने तैयार किया है। इस मौके पर साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म का दुर्लभ संगम देखने को मिला।


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