देश में विशेषज्ञों के अनुमान से भी ज्यादा तेजी से फैल रहा कोरोना

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August 24, 2026

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देश में विशेषज्ञों के अनुमान से भी ज्यादा तेजी से फैल रहा कोरोना

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- देश में एक तरह से कोरोना विस्फोट हो चुका है जो अब विशेषज्ञों के अनुमान से भी तेजी से फैल रहा है हालांकि विशेषज्ञों ने देश में जुलाई के चैथे सप्ताह में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 10 लाख पार होने का अनुमान जाहिर किया था लेकिन कोरोना ने यह आंकड़ा जुलाई मध्य में ही छू लिया है जिसकारण अब यह संभावना जोर पकड़ने लगी है कि क्या कोरोना का सामुदायिक फैलाव हो चुका है और कोरोना अपने पीक की तरफ बढ़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञ सामुदायिक फैलाव व पीक को लेकर अभी भी इंकार कर रहे है लेकिन यह संभावना जरूर बनी हुई है कि अगले साल तक देश में कोरोना के 3 से 5 करोड़ लोग संक्रमित होंगे। हालांकि विभिन्न गणितीय मॉडल के आधार पर विशेषज्ञों ने बीते जून माह में ही कोरोना के रोजाना बढ़ रहे मामलों को लेकर आगाह कर दिया था।
केरल के डाटा विशेषज्ञ जेम्स विल्सन का कहना है कि सरकार अब तक कोरोना का एक पक्ष जनता के सामने रख रही है। जबकि संक्रमण के बढ़ते ग्राफ पर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है। 26 जून की स्थिति को लेकर उन्होंने 2 जुलाई तक मरीजों की संख्या छह लाख और आठ जुलाई तक यह आंकड़ा सात लाख के करीब होने की आशंका व्यक्त की थी। जोकि सच साबित हुई। ठीक इसी तरह का आकलन राजस्थान के जोधपुर आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर रीजो एम जॉन ने भी किया था। उनका कहना था कि 22 जुलाई तक देश में संक्रमितों की संख्या 10 लाख पार हो सकती है। जॉन का कहना है कि हालात अब भी बदले नहीं हैं। मरीजों की संख्या 20 दिन में दोगुना हो रही है। इस रफ्तार को रोकने के लिए सरकार के उपाय फिलहाल नाकाफी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भारत कोरोना वायरस के पीक से दूर है। सफदरजंग अस्पताल के ही डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि मरीजों की संख्या भले ही लाखों में हो, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि यह कोरोना का पीक है। वहीं दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि भले ही इसे पीक न कहें लेकिन उसका संकेत जरूर माना जा सकता है। वहीं एक अन्य महामारी विशेषज्ञ प्रो. विश्व मोहन गुप्ता का कहना है कि हकीकत में कोरोना का पीक भारत में इटली जैसा होगा या अमेरिका की तरह, यह कोई नहीं जानता।
इनके अलावा बंगलूरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के शोद्यार्थियों ने भी गणितीय मॉडल के आधार पर अगले वर्ष जनवरी तक भारत में मरीजों की संख्या करीब 3 से 5 करोड़ होने की आशंका व्यक्त की है। इनके मुताबिक आगामी एक सितंबर तक देश में मरीजों की संख्या 35 लाख हो सकती है, जिनमें से सक्रिय मरीज 10 लाख और 1.40 लाख मौतें शामिल होंगी। ठीक इसी तरह 1 नवंबर तक मरीजों की कुल संख्या 1.2 करोड़ होगी। साथ ही वायरस के चलते तब तक पांच लाख लोगों की मौत हो सकती है।

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