पश्चिम एशिया संकट की गूंज से दलाल स्ट्रीट में हड़कंप            

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September 7, 2026

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-सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक लुढ़का

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-  पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय पूंजी बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन निवेशकों में घबराहट का माहौल रहा, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ बंद हुए। 30 कंपनियों पर आधारित BSE Sensex 1048.34 अंक फिसलकर 80,238.85 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं 50 शेयरों वाला NSE Nifty 312.95 अंक टूटकर 24,865.70 पर आ गया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा और शुरुआती घंटों में गिरावट और भी गहरी थी।

शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली
कारोबार की शुरुआत में ही बिकवाली का दबाव हावी हो गया। सेंसेक्स एक समय 2,700 अंकों से ज्यादा नीचे चला गया था। हालांकि निचले स्तरों पर कुछ खरीदारी लौटी, जिससे अंत में नुकसान कुछ कम हुआ। निफ्टी भी दिन के दौरान 575 अंकों तक गिर गया था। वैश्विक संकेत कमजोर रहे और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने बाजार की धारणा को नकारात्मक बनाए रखा।

रुपये पर दबाव, डॉलर के मुकाबले कमजोरी
विदेशी पूंजी बहिर्वाह और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय मुद्रा पर भी दबाव दिखा। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 42 पैसे गिरकर 91.50 के आसपास बंद हुआ। मुद्रा बाजार में यह कमजोरी आयात लागत बढ़ने की आशंका को दर्शाती है।

किन शेयरों में ज्यादा गिरावट
सेंसेक्स समूह की कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन, लार्सन एंड टुब्रो, अदानी पोर्ट्स, मारुति, एशियन पेंट्स और बजाज फिनसर्व जैसे शेयरों में प्रमुख गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, सन फार्मा और आईटीसी जैसे कुछ चुनिंदा शेयर हरे निशान में बंद हुए, जिससे व्यापक गिरावट के बीच सीमित सहारा मिला।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता
बाजार विश्लेषक अजय बग्गा का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में निवेशक सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं। उनके अनुसार ईरान-अमेरिका तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। यदि होरमुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होती है तो तेल महंगा होगा, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर महंगाई और चालू खाता घाटे का दबाव बढ़ेगा।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने भी कहा कि तेल कीमतों में तेजी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव मुद्रास्फीति को बढ़ा सकता है। इससे ऊर्जा और रसायन आधारित उद्योगों के लाभांश पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि बाजार में अस्थिरता सूचकांक में हल्की वृद्धि निवेशकों की बढ़ती सतर्कता का संकेत है।

वैश्विक बाजारों का हाल
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान का निक्केई सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक गिरा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग दो प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गया। यूरोपीय बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार पिछला सत्र नुकसान के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

कच्चे तेल में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 8 प्रतिशत बढ़कर 78.95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। तेल कीमतों में यह तेजी निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हालिया सत्र में हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू निवेशकों ने खरीदारी कर कुछ संतुलन बनाने की कोशिश की।

आगे की राह
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है। होली के अवसर पर मंगलवार को शेयर बाजार बंद रहेंगे, जिससे निवेशकों को अगली चाल पर विचार करने का समय मिलेगा।

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