चमोली में बादल फटा: नंदानगर व धुरमा गांव में तबाही, कई लोग लापता

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चमोली में बादल फटा: नंदानगर व धुरमा गांव में तबाही, कई लोग लापता

उत्तराखंड/चमोली/अनीशा चौहान/- उत्तराखंड एक बार फिर प्रकृति की भीषण मार झेल रहा है। सोमवार रात से शुरू हुई तबाही थमने का नाम नहीं ले रही। देहरादून के बाद अब चमोली जिले के नंदानगर घाट क्षेत्र में बुधवार रात को बादल फटने की दो घटनाओं ने हालात और बिगाड़ दिए। इस आपदा ने नंदानगर, धुरमा और आसपास के गांवों को गहरी चोट पहुंचाई है, जहां छह से अधिक मकान मलबे में दब गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 10 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। राहत-बचाव कार्य SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन की मदद से जारी है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और मलबे के कारण मुश्किलें बढ़ गई हैं।

देर रात दो जगह फटा बादल

बुधवार रात करीब 2:30 बजे नंदानगर के कुंतरी लंगाफाली वार्ड में पहला बादल फटा। अचानक आए सैलाब और मलबे ने छह मकानों को ढहा दिया, जिनमें कई परिवार फंस गए। चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि इस घटना में सात लोग लापता हो गए, जबकि दो को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं, धुरमा गांव में दूसरी घटना ने भारी तबाही मचाई। वहां कई इमारतें और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। कुछ रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या 10 बताई जा रही है, जिनमें स्थानीय निवासी और पर्यटक भी शामिल हो सकते हैं।

तीन गांवों पर आपदा का कहर

आपदा का सबसे बड़ा असर नंदानगर घाट क्षेत्र में देखने को मिला। कुंतरी वार्ड और धुरमा गांव के साथ-साथ अन्य आसपास के गांवों में भी तबाही का असर देखा गया। ग्रामीणों ने बताया कि रात के अंधेरे में अचानक पानी और पत्थरों का शोर सुनाई दिया, लेकिन तब तक बचने का मौका नहीं था। करीब 20 से 25 परिवार इस आपदा की चपेट में आए हैं। घरों, दुकानों, वाहनों और खेती-बाड़ी का भारी नुकसान हुआ है।

सड़क संपर्क टूटा, चारधाम यात्रा प्रभावित

सड़कें कटने से राहत टीमों को गांवों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नंदानगर-जोशीमठ मार्ग पर भूस्खलन से यातायात ठप हो गया है। चारधाम यात्रा पर भी इसका असर पड़ रहा है। अलकनंदा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे आसपास के इलाकों में खतरा मंडरा रहा है। वहीं, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चमोली समेत कई जिलों में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। चेतावनी के मुताबिक, 20 सितंबर तक भारी से अत्यधिक बारिश, भूस्खलन और बाढ़ की आशंका बनी रहेगी।

राहत और पुनर्वास की कोशिशें

जिला प्रशासन ने तुरंत SDRF, NDRF और पुलिस की टीमें राहत-बचाव के लिए तैनात कर दीं। गुरुवार सुबह तक दो लोगों को मलबे से जिंदा निकाला जा सका है, लेकिन बाकी लोगों की तलाश अभी जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून से हालात की समीक्षा की और केंद्र सरकार से सहायता की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों का पुनर्वास प्राथमिकता पर होगा और सेना सहित अन्य एजेंसियां युद्धस्तर पर राहत कार्य में लगी हैं।

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