न्यूजीलैंड/अनीशा चौहान/- न्यूजीलैंड की संसद में आज यानी गुरुवार को एक दिलचस्प और जोरदार बहस देखने को मिली। दरअसल, सबसे कम उम्र की माओरी सांसद हाना-रावहिती करियारीकी मैपी-क्लार्क ने सदन में स्वदेशी संधि विधेयक का विरोध करते हुए विधेयक की एक कॉपी फाड़ दी। इसके बाद, उन्होंने संसद में ही पारंपरिक हाका नृत्य कर अपना विरोध दर्ज किया।
क्या है पूरा मामला?
न्यूजीलैंड की संसद में आज सिद्धांत विधेयक पर मतदान के लिए सांसद इकट्ठा हुए थे। 22 साल की माओरी सांसद हाना-रावहिती करियारीकी मैपी-क्लार्क ने इस विधेयक का विरोध करते हुए पहले विधेयक की एक कॉपी फाड़ी, और फिर संसद में पारंपरिक हाका नृत्य शुरू कर दिया। यह देख, कई अन्य सांसद भी इस विरोध में शामिल हो गए।
यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जैसे ही मैपी-क्लार्क ने बोलना शुरू किया, उन्होंने विधेयक की कॉपी फाड़ दी और हाका नृत्य करना शुरू कर दिया।
सत्र को किया स्थगित
इस हंगामे के कुछ ही देर बाद, सदन में मौजूद अन्य सांसद भी मैपी-क्लार्क के इस विरोध में शामिल हो गए, जिससे सत्र में अव्यवस्था फैल गई। इसके बाद, संसद के स्पीकर गेरी ब्राउनली ने सदन के सत्र को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया।
विधेयक पर विवाद क्यों?
अब सवाल ये उठता है कि इस विवादास्पद संधि सिद्धांत विधेयक को लेकर विवाद क्यों हो रहा है? दरअसल, इस विधेयक को बहुत कम समर्थन मिला है, जिस वजह से इसे पास करना मुश्किल है। आलोचकों का कहना है कि यह विधेयक नस्लीय विवाद और संवैधानिक उथल-पुथल की धमकी दे रहा है।
यह विधेयक 1840 की वेटांगी संधि से जुड़े सिद्धांतों को लेकर है, जो सरकार और माओरी जनजातियों के बीच संबंधों को निर्देशित करता है। इस संधि के तहत माओरी जनजातियों को अपनी भूमि बनाए रखने और अपने हितों की रक्षा करने के व्यापक अधिकारों का वादा किया गया था। विधेयक में ये स्पष्ट किया गया है कि ये अधिकार अब सभी न्यूजीलैंडवासियों पर लागू होने चाहिए।
कौन हैं हाना रावहिती?
22 साल की हाना रावहिती करियारीकी मैपी-क्लार्क न्यूजीलैंड की ते पाटी माओरी (Maori Party) का प्रतिनिधित्व करती हैं। हाना रावहिती 2023 में न्यूजीलैंड के आम चुनाव में चुनी गईं थीं। संसद में अपने पहले भाषण के दौरान उन्होंने पारंपरिक हाका डांस किया था, जो माओरी समुदाय का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक नृत्य है।
हाना रावहिती का यह कदम न्यूजीलैंड की माओरी जनजाति के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है। इस विरोध के जरिए उन्होंने स्वदेशी संधि विधेयक के खिलाफ अपनी ताकतवर राय व्यक्त की है।
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