चुनाव से पहले ‘डंकी रूट’ का मुद्दा कांग्रेस के लिए ‘संजीवनी’ होगा साबित?

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September 7, 2026

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 चुनाव से पहले ‘डंकी रूट’ का मुद्दा कांग्रेस के लिए ‘संजीवनी’ होगा साबित?

मानसी शर्मा /-   हरियाणा के विधानसभा चुनावों से पहले एक नया मुद्दा लगातार उभर कर सामने आ रहा है। वो है गैर कानूनी तरीके से विदेश पलायन और डंकी रूट का। हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुपचुप तरीके से हरियाणा के घोघड़ीपुर गांव का दौरा किया था। यहां उन्होंने अमेरिका में रहने वाले अमित के परिजनों से मुलाकात की, जो अवैध डंकी रूट के जरिए अमेरिका पहुंचे थे। इस घटना ने हरियाणा की राजनीति में विदेश पलायन के मुद्दे को एक बार फिर से ज्वलंत बना दिया है। लेकिन सवाल ये उठता है की आने वाले हरियाणा के विधानसभा चुनावों में ये डंकी रूट का मुद्दा कैसे कांग्रेस को फायदा दिलवाएगा और सत्तारूढ़ बीजेपी की परेशानी बढ़ाएगा?

बता दें डंकी रूट का मुद्दा सीधे बेरोजगारी से जुड़ा है। कांग्रेस का इस चुनाव में मुख्य मुद्दा ही बेरोजगारी का है। पिछले दो दशक से हरियाणा के युवा बड़ी संख्या में नौकरी की तलाश में विदेश जाकर बस रहें हैं। नौकरी और काम की तलाश में विदेश जा रहे इन नौजवानों के परिजनों और विपक्षी दल के ज्यादातर नेताओं का मानना है कि रोजगार की कमी उन्हें उनके बच्चों से दूर कर रही है। ऐसे में जब तमाम कोशिशों के बाद युवाओं का वीजा नहीं लगता है तो वह डंकी रूट से विदेश जाते हैं। जो कि अवैध होने के साथ-साथ बेहद खतरनाक भी है।

कांग्रेस के लिए संजीवनी बनेगा डंकी रूट का मुद्दा?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा के जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, अंबाला, हिसार, रोहतक और सिरसा से सबसे ज्यादा तादाद में युवा डंकी रूट के सहारे विदेशों में एंट्री ले रहे हैं। बेरोजगारी और पलायन किसी भी राज्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसलिए इस मुद्दे पर सालों से सियासत भी उतनी शिद्दत से होती रही है। अक्सर ही राजनीतिक दल चुनाव में या उससे ठीक पहले इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी को घेरने की कोशिश करते हैं। हरियाणा में विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में भला कांग्रेस कैसे इसे चुनावी मुद्दा बनाने से पीछे रहती। यही वजह है कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान होने के बाद से पार्टी के प्रचार से खुद को दूर रखने वाले राहुल गांधी अचानक करनाल पहुंचे। राहुल गांधी यहां पार्टी के लिए कोई चुनाव प्रचार करने नहीं बल्कि इस मुद्दे को इलेक्शन से पहले पूरी तरह से सेट करने की कोशिश में यहां आए थे।  

राहुल ने यहां अमेरिका में रह रहे हरियाणा के लोगों के परिजनों सें मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवार के लोगों इसके पीछे की वजह का पता और इससे होने वाले नुकसान को लेकर चर्चा की। राहुल की इस मीटिंग के बाद भला उनके नेता कैसे पीछे रहते। अब हरियाणा कांग्रेस के नेता इस मुद्दे को चुनाव में भुनाने की कोशिश में जुट गए हैं। हांलाकि, कांग्रेस हरियाणा चुनाव में इस मुद्दे को भुनाने में कितनी कामयाब होती है ये तो आने वाला समय ही बताएगा। बेरोजगारी हमेशा से ही हर चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। हाल ही में प्रियंका गांधी ने भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए उसपर ‘बेरोजगारी की महामारी’ फैलाने का आरोप भी लगाया था। इसके अलावा पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा भी लोकसभा चुनावों से पहले से ही बीजेपी को प्रदेश में नौकरी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर घेरते हुए आए हैं। कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार में जुटे सांसद दीपेंद्र हुड्डा भी अपनी हर सभा में डंकी रूट और बेरोजगारी का मुद्दा जोरशोर से उठा रहें हैं।  

बीजेपी के लिए खतरे की घंटी?

हरियाणा के लिहाज से डंकी रूट का मुद्दा क्या वाकैयी इतना बड़ा है, जिसको लेकर कांग्रेस के कई दिग्गज नेता लगातार बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार हरियाणा चुनाव में कांग्रेस हाईकमान भी डंकी रूट का मुद्दा उठाकर सत्ता में वापसी की चाबी खोजने की कोशिश में है। कांग्रेस के नेताओं को लगता है कि वो इस बार चुनाव में इस मुद्दे को जितना ताकत से उठाएगी वो उतना ही प्रदेश की सत्ता के नजदीक जा पाएगी। वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी इस मुद्दे को लेकर कोई लापरवाही बरतने की गलती नहीं करेगी। अगर बीजेपी चुनाव से पहले इस मुद्दे को हल्के में लेने की गलती करती है तो हो सकता है इसका खामियाजा उसे चुनाव में उठाना पड़ जाए।

क्योंकि, कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों के दौरान संविधान बदलने, आरक्षण, MSP, किसान, पहलवान और अग्निवीर जैसे मुद्दों को इतने पुरजौर तरीके से उठाया जिससे बीजेपी को ज्यादा तो नहीं लेकिन कुछ सीटों का नुकसान जरूर उठाना पड़ा था। लोकसभा चुनाव में 400 सीटों का दम भरने वाली बीजेपी अपने दम पर बहुमत के आंकड़े तक को नहीं छू पाई थी।…

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