कोलकाता रेप मामले पर ममता बनर्जी की चिट्ठी को लेकर टीएमसी और बीजेपी के बीच तीखी बहस

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March 6, 2026

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कोलकाता रेप मामले पर ममता बनर्जी की चिट्ठी को लेकर टीएमसी और बीजेपी के बीच तीखी बहस

कोलकाता/नई दिल्ली/अनीशा चौहान/- कोलकाता रेप और हत्या का जिन्न ममता बनर्जी और उनकी सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा है। एक तरफ इस घटना के खिलाफ लोग पिछले 15 दिनों से सड़कों पर हैं तो दूसरी तरफ कोर्ट की ओर से भी सरकार की आलोचना हो रही है। हर गुजरते दिन के साथ इस मामले में सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रधानमंत्री मोदी को लिखी चिट्ठी पर टीएमसी और बीजेपी के बीच जवाबी हमला जारी है।

बता दें कि, पश्चिम बंगाल बीजेपी के उपाध्यक्ष सौमित्र खान ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा है और इस पत्र को लिखने को नौटंकी बताया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘इतना बड़ा ड्रामा दुनिया में कहीं नहीं देखने को मिलेगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दिया गया पत्र पूरी तरह से नाटक है।

सौमित्र खान ने क्या कहा?

सौमित्र खान ने कहा, ‘ममता बंदोपाध्याय इस दुनिया की सबसे नाटकीय नेता हैं।’ इसके साथ ही उन्होंने सीएम ममता बनर्जी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि आप रेप पीड़िता की मां को 10 लाख रुपये में खरीद रही हैं।

‘ममता ने देश के लिए कुछ अच्छा नहीं किया’

उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधने के साथ-साथ रोहिंग्याओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘अगर आप इसे जाति के हिसाब से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि इन सबके पीछे रोहिंग्या हैं। ममता बनर्जी ने कभी भी देश के लिए कुछ अच्छा नहीं किया। वह अब पश्चिम बंगाल और महिलाओं को बर्बाद करने पर तुली हुई है।’ यह पत्र केवल जनता को भ्रमित करने के लिए लिखा गया है।

ममता बनर्जी ने पत्र में क्या लिखा?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दुष्कर्म जैसे वीभत्स मामले में शामिल आरोपियों को 15 दिन के अंदर कड़ी सजा देने और महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने वाला कानून बनाने की मांग की है।उन्होंने लिखा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि महिलाएं सुरक्षित महसूस करें, ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ अनुकरणीय सजा का प्रावधान करने वाले कड़े केंद्रीय कानून होने चाहिए और ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों की स्थापना पर भी विचार किया जाना चाहिए। ताकि 15 दिन के अंदर सुनवाई पूरी की जा सके।

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