सच्चे प्रेम की प्रतीकः सबरी और उर्मिला की अमर कहानी

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 19, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

सच्चे प्रेम की प्रतीकः सबरी और उर्मिला की अमर कहानी

बिन भ्रमर के कहां खिल सकी है कली
फिर बहारों का मिलना कहाँ भाग्य में
दो किनारे कहां मिल सके हैं कभी
दो किनारो का मिलना कहां भाग्य में
मन की कुटिया बुहारे हुये एक सती,
                   बन के सबरी लिये बेर बैठी रही
राम के राह पर वो बिछा के नयन,
  द्वार पर ही बहुत देर बैठी रही l

प्रेम मानक को कोई कैसे गढ़ता भले
        भावनायें वचन की जो ना शुद्ध हो
 प्रीत के पत्र कोई कैसे पढता भले
        जब हृदय द्वार पहले से अवरुद्ध हो
भाव कैसे वो पहुँचाती  अंतस तलक
                        चिट्ठीयों के लिए ढेर बैठी रही
राम के राह पर वो बिछा के नयन,
  द्वार पर ही बहुत देर बैठी रही l

 राम के संग वन में लखन जो गये
 आंख बहती हुई एक नदी हो गई
 राम के साथ तो संगिनी थी मगर
 उर्मिला की सकल जिंदगी खो गई
पूरे चौदह बरस बिरहनी उर्मिला
              ले के किस्मत का बस फेर बैठी रही
राम के राह पर वो बिछा के नयन,
  द्वार पर ही बहुत देर बैठी रही l

मनीष मधुकर 

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox