नई दिल्ली/- वैसे तो नकली दूध या सिंथेटिक दूध का कारोबार पूरे साल चलता है लेकिन त्यौहारों के मौके पर बढ़ी दूध की मांग को देखते हुए नकली दूध बनाने वाले मिलावट खोर गिरोह भी पूरी तरह से सक्रिय हो जाते है। ये दूध महज 10 मिनट में तैयार हो जाता है लेकिन अगर इसकी हकीकत जानेगें तो आप भी चौंक जायेंगे कि कहीं उनके घर में आने वाला दूध भी तो सिंथेटिक दूध तो नही है। क्या हम अपने बच्चों को सिंथेटिक दूध पिला रहे हैं। कई सारे सवाल आपके जहन में घूम जायेंगे। लेकिन ये सत्य है कि राजस्थान से दिल्ली तक यह दूध धड़ल्ले से बिक रहा है। 10 रूपये में 10 लीटर दूध तैयार करने वाले बिना रोकटोक अपना व्यापार चला रहे हैं।
ये दूध गाय या भैंस का नहीं है। डिटर्जेंट, रिफाइंड ऑयल, कास्टिक सोडा और शैंपू से ये दूध तैयार किया जाता है। राजस्थान और दिल्ली के कई जिलों में हजारों परिवार रोज ये जहरीला दूध पी रहे हैं। इस दूध में इतने खतरनाक केमिकल मिलाए जाते हैं जो लीवर, किडनी को डैमेज कर देते हैं। इसे पीने से कैंसर जैसी बीमारी या फिर मौत भी हो सकती है।
इस ’जहर’ के सौदागरों का गढ़ है अलवर-भरतपुर जिले का मेवात क्षेत्र बताया जा रहा है। गोविंदगढ़ (अलवर) कस्बे के दर्जनों गांवों के सैकड़ों घरों में सिंथेटिक दूध बनाने वाली फैक्ट्रियां चल रही हैं। यह दूध बड़ी-बड़ी डेयरियों से सप्लाई होता हुआ आम घरों और मिठाई की दुकानों तक पहुंच रहा है।
इस संबंध में सरस डेयरी के चेयरमैन विश्राम गुर्जर ने माना कि गोविंदगढ़ और आस-पास के क्षेत्रों से 1 लाख लीटर से अधिक सिंथेटिक दूध रोजाना सप्लाई होता है। कुछ रिपोर्टरों ने गोविंदगढ़ से लिए एक सिंथेटिक दूध के पैकेट को सरस डेयरी की ही लैब में टेस्ट करवाने को कहा तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये। डेयरी में जांच के बाद जब परिणामों पर नजर डाली तो पता चला कि दूध बढिया है और पूरा फैट है। जांचकर्ताओं ने उसकी बाजार कीमत 65 से 70 रूपये बताई। सिंथेटिक दूध में इतनी फैट देख डेयरी चेयरमैन भी चौंक गए। लेकिन साथ ही उन्होंने दावा किया कि ये दूध सरस डेयरी में नहीं आ सकता, ये लोग प्राइवेट डेयरियों में सप्लाई कर रहे हैं।
कार्यवाही करने में डेयरी चेयरमैन ने जताई असमर्थता
सैंपल चेक के बाद डेयरी चेयरमैन ने अपनी टीम भेजकर कार्रवाई करने को कहा, लेकिन उन्होंने कहा कि डेयरी टीम छापे की कार्रवाई करती है, लेकिन फूड डिपार्टमेंट, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम को साथ लेना पड़ता है। कई बार पुलिस टीम नहीं आती, तो कार्रवाई के दौरान हिंसा तक हो जाती है।

2000 से ज्यादा कलेक्शन सेंटर, दिल्ली-एनसीआर तक नेटवर्क
अलवर जिला मावे और दूध की सप्लाई का हब है। ऐसे में नकली दूध बनाने वाले बड़े सप्लायर्स ने गोविंदगढ़ क्षेत्र से सटे गांवों में बड़े-बड़े कलेक्शन सेंटर बना रखे हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में दूध फैक्ट्री कहा जाता है। एक अनुमान के मुताबिक इसकी संख्या 2000 से भी ज्यादा है।
यहां बाइकों पर टंकियों या फिर छोटे-बड़े टैंकरों से दूध की सप्लाई कलेक्शन सेंटर्स तक पहुंचती है। जहां दूध को चिल्ड प्लांट में डाल दिया जाता है। फिर इसकी सप्लाई प्रदेश में इनके खरीददारों तक की जाती है। सिथेटिक दूध बनाने में सबसे अधिक बदनाम क्षेत्र अलवर जिले का गोविंदगढ़ कस्बा है। यहां के खैरथल, रामगढ़, बड़ौदामेव, किशनगढ़ बास, इस्माइलपुर, जतौला जैसे कस्बों का नेटवर्क दिल्ली तक फैला है। राजस्थान में मुख्य तौर पर अलवर, भरतपुर, दौसा, अजमेर, जयपुर, जोधपुर तक और दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र तक इस दूध की सप्लाई होती है।

आमजन इसलिए नहीं कर पाते सिंथेटिक दूध की पहचान
विशेषज्ञों के अनुसार सिंथेटिक दूध को आमजन एक नजर में नहीं पहचान पाते। इसका बड़ा कारण है कि मिलावटखोर सिंथेटिक दूध को लगभग आधी-आधी मात्रा में असली दूध में मिला देते हैं। इसके कारण दूध की गंध और स्वाद के जरिए नकली दूध को पकड़ पाना काफी मुश्किल हो जाता है। मिलावट के कारण स्वाद भी असली दूध के जैसा हो जाता है और गंध भी असल दूध जैसी ही हो जाती है।
पकड़े जाने के डर से सप्लायर असली दूध में सिंथेटिक दूध की मात्रा आधी के बजाय कम रखता है। ऐसे में घर पर जांच के तरीके फेल हो जाते हैं। कुछ दिनों के अंतराल में दूध सेंपल लैब में ले जाकर जांच करवाएं।

3 साल से कड़ी सजा का कानून अटका
राजस्थान सरकार ने वर्ष 2018 में मिलावट रोकथाम के लिए कानून में संशोधन किया था। विधानसभा में संशोधन बिल पारित भी हो गया, लेकिन अब तक लागू नहीं हो पाया है। यदि अटका हुआ संशोधन बिल कानूनी रूप ले ले, तो मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी सजा के दरवाजे खुल जाएंगे। मिलावटखोरी गैर जमानती अपराध बन जाएगा और दोषियों को 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकेगी।
पुलिस को मिलेगा अधिकार : पुलिस को खुद के स्तर पर प्रसंज्ञान लेने का अधिकार
फास्ट ट्रेक कोर्ट : नए कानुन में सभी संभाग मुख्यालयों पर मिलावट के मामलों में सुनवाई के लिए फास्ट ट्रेक अदालतें खोलने का प्रावधान है। इससे सुनवाई जल्दी हो और दोषी को जल्द सजा मिल सके।
मृत्यु साबित करना कठिन : नए कानून में मिलावटखोर को आजीवन कारावास की सजा दिलाने के लिए साबित करना होगा कि मिलावटी पदार्थ से किसी की मृत्यु हुई है।
13 हजार नमूने मिलावटी, 2500 जानलेवा, लेकिन कोई सजा नहीं
वर्ष 2011 में फूड सेफ्टी एक्ट बना, लेकिन मिलावटखोर बेखौफ अपना काम कर रहे हैं। नमूना जांच में मिलावट भी साबित हो जाए, तो जमानती अपराध होने के कारण दोषी छूट जाते हैं और अपना कारोबार फिर शुरू कर देते हैं। एक्ट लागू होने के बाद पिछले दस वर्षों (2011 से 2021) में 13 हजार नमूने मिलावटी मिले हैं, लेकिन कोई सजा तक नहीं पहुंच पाया। इनमें करीब 2500 नमूनों में जानलेवा खतरनाक कैमिकल पाए गए, लेकिन मिलावटखोर जमानत पर छूट गए।


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