अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर इस्लामाबाद में संभव                                      

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October 14, 2026

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-होर्मुज पर फिर बढ़ा तनाव -सोमवार को पाकिस्तान में हो सकती है अहम बैठक

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बातचीत का दूसरा दौर सोमवार को इस्लामाबाद में आयोजित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताहांत पाकिस्तान पहुंच सकता है। हालांकि अभी तक अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ट्रंप बोले- समझौते के करीब हैं दोनों देश
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच जारी वार्ता किसी बड़े समझौते के करीब पहुंच रही है। ट्रंप का कहना है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द कोई निर्णायक नतीजा सामने आ सकता है। दूसरी ओर, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ट्रंप के उन दावों पर सवाल उठाए हैं जिनमें कहा गया था कि तेहरान कई मुद्दों पर झुकने को तैयार है। ईरानी पक्ष का कहना है कि अभी किसी अंतिम सहमति तक पहुंचना बाकी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बना हुआ है तनाव
शुक्रवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से बहुत कम जहाज गुजरते दिखाई दिए। इससे साफ है कि इस अहम समुद्री मार्ग पर तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि जलडमरूमध्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला है, लेकिन हालात सामान्य नहीं हैं।

ईरानी संसद की चेतावनी
ईरानी संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी और नाकाबंदी खत्म नहीं की, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद किया जा सकता है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी युद्धपोतों और निगरानी अभियान के चलते समुद्री रास्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

अमेरिका ने भी रखी अपनी शर्त
राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान के साथ अमेरिका की डील “100 प्रतिशत” पूरी नहीं हो जाती, तब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी। वॉशिंगटन का मानना है कि ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है ताकि बातचीत में उसे अपने शर्तों के अनुसार परिणाम मिल सके। इसी वजह से दोनों देशों के बीच वार्ता के साथ-साथ तनाव भी लगातार बना हुआ है।

दुनिया की नजर इस्लामाबाद पर
अगर सोमवार को यह वार्ता होती है, तो पूरी दुनिया की नजर इस्लामाबाद पर होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि अभी भी दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।

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