इस्लामाबाद/- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक से कर्ज जारी करवाने की पाकिस्तान की चुनौती और बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने पिछले हफ्ते पाकिस्तान की रेटिंग गिरा कर उसे दिए गए कर्ज के सुरक्षित होने पर आशंका और बढ़ा दी थी। उसके बाद पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशहाक डार ने मूडीज के आकलन को गलत साबित करने की कोशिश में रविवार को एलान कर दिया कि पाकिस्तान कर्ज रिस्ट्रक्चर (भुगतान में रियायत) करने के लिए कर्जदाता देशों के समूह पेरिस क्लब से संपर्क नहीं करेगा। मगर जानकारों का कहना है कि इससे कर्जदाता बहुपक्षीय एजेंसियां संतुष्ट होंगी, इसकी संभावना कम है।
पाकिस्तान ने दो दिन पहले विश्व बैंक को आश्वासन दिया था कि वह उसकी शर्तों पर अमल के लिए नया कर्ज मिलने के पहले ही कदम उठाएगा। पाकिस्तान विश्व बैंक से एक बिलियन डॉलर का कर्ज पाने की कोशिश में है। डार वाशिंगटन रवाना हो रहे हैं, जहां उनकी विश्व बैंक के साथ-साथ आईएमएफ के अधिकारियों से भी बातचीत होगी। आईएमएफ ने कुछ समय पहले पाकिस्तान के लिए कर्ज की नई किस्त मंजूर की थी। लेकिन उसने शर्त लगाई थी कि पाकिस्तान अपने अन्य कर्जदाताओं से ऋण राहत पाने की कोशिश करे। पाकिस्तान के ऊपर जिन कर्जदाताओं के ऋण हैं, उनमें चीन और पेरिस क्लब के सदस्य पश्चिमी देश शामिल हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक पाकिस्तान में बढ़ते राजनीतिक मतभेदों के कारण भी कर्जदाता देश चिंतित हैं। आर्थिक मुसीबत और राजनीतिक तनाव के कारण पाकिस्तान की स्थिति लगातार ज्यादा अस्थिर होती जा रही है। इसी बीच मूडीज ने उसे तगड़ा झटका दिया। उसने पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग को बी-3 से गिरा कर सीएए-1 कर दिया। इशहाक डार ने रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मूडीज के इस फैसले का एक बड़ा कारण यह है कि पाकिस्तान ने पेरिस क्लब के देशों से कर्ज राहत देने की गुजारिश की है। इन देशों का पाकिस्तान के ऊपर 10 बिलियन डॉलर का कर्ज है। उन्होंने इन अंदेशों का खंडन किया कि पाकिस्तान अपने बॉन्डधारकों को ब्याज या मूल धन के भुगतान में देर करने वाला है। उन्होंने कहा कि तमाम बॉन्ड का भुगतान तय समय पर किया जाएगा।
पिछले एक महीने में पाकिस्तान के डॉलर में बेचे बॉन्ड्स की कीमत में भारी गिरावट आई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सितंबर के मध्य में देश में आई भीषण बाढ़ का हवाला देते हुए धनी देशों से कर्ज राहत देने की मांग की थी। उनकी इस मांग से पाकिस्तान की वित्तीय हालत को लेकर दुनिया भर में आशंका गहरा गई। बॉन्ड्स की कीमत में भारी गिरावट को इसी का नतीजा बताया गया है।
पाकिस्तान को इस वर्ष पांच दिसंबर को एक बिलियन डॉलर के बॉन्ड का भुगतान निजी अंतरराष्ट्रीय बॉन्डधारकों को करना है। समझा जाता है कि अगर आईएमएफ से समय पर कर्ज नहीं मिला, तो पाकिस्तान के लिए इन बॉन्ड्स का भुगतान कठिन हो जाएगा। लेकिन इशहाक डार ने कहा कि पाकिस्तान सरकार अपनी कर्ज संबंधी देनदारियां समय पर पूरा करेगी। साथ ही वह आईएमएफ से कर्ज पाने के लिए अब किसी समझौते के लिए नए सिरे से बातचीत नहीं करेगा।


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