किसानों के साथ हुए धोखे पर दिल्ली में जनता के बीच जायेगी भाकियू- विरेन्द्र डागर

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किसानों के साथ हुए धोखे पर दिल्ली में जनता के बीच जायेगी भाकियू- विरेन्द्र डागर

-निगम चुनावों में भाजपा का झेलना होगा किसानों का आक्रोश, मुआवजे को लेकर आप पर भी बरसे किसान नेता -किसानों की सभी सब्सिडी बंद कर एक मुश्त 5 हजार पेंशन दे केंद्र सरकार- पूर्व पार्षद प्रीतम डागर

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- किसानों का आंदोलन खत्म हुए दो महीने के करीब हो गये है लेकिन अभी तक न तो किसानों की कोई मांगे मानी गई है और न ही किसानों पर दर्ज मुकदमें वापिस लिये गये है। जिसे देखते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष विरेन्द्र डागर ने कहा कि किसानों के साथ हुए धोखे पर भारतीय किसान यूनियन दिल्ली के निगम चुनावों में दिल्ली की जनता के बीच जायेगी और भाजपा की वादा खिलाफी व धोखे के विरूध प्रचार कर जनसमर्थन मांगेगी। हालांकि उन्होने कहा कि भाकियू ना चुनाव लड़ेगी और ना ही किसी पार्टी का समर्थन करेगी। भारतीय किसान यूनियन सिर्फ किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए ही काम करेगी। बुधवार भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष विरेन्द्र डागर ने नजफगढ़ मैट्रो न्यूज की टीम से बात करते हुए कहा कि किसानों ने आंदोलन समाप्त नही किया है बल्कि उसे केंद्र सरकार के अनुरोध पर सिर्फ स्थगित किया गया है। केंद्र सरकार ने किसान नेताओं को उनकी सभी मांगे मानने व तीनों कृषि कानूनों को वापस करने का वादा किया था जिसके बाद किसानों ने अपनी पांच मांगे सरकार के सामने रखी थी जिसमें सबसे पहले किसानों ने पूरे देश में एमएसपी प्रणाली लागू करने, आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने, आंदोलन में शहीद हुए किसानों को मुआवजा देने, गृहराज्यमंत्री के बेटे के खिलाफ कार्यवाही करने तथा तीनों कृषि कानूनों पूरी तरह से समाप्त् करने की मांग की थी। और साथ ही यह भी कहा था कि किसान मोर्चा 15 जनवरी तक सरकार के जवाब का इंतजार करेगा और अगर सरकार ने उनकी मांगे नही मानी तो फिर से मोर्चा आंदोलन का रूख करेगा। उन्होने कहा कि सरकार ने अभी तक उनकी कोई मांग नही मानी है ऊपर से टेनी के बेटे को भी जेल से बाहर निकालकर छुड़ाने की कोशिश की जा रही है जिसे किसान बर्दाश्त नही करेंगे और फिर से आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर मैदान में उतरेंगे। उन्होने कहा कि दिल्ली में किसानों को किसान नही माना जा रहा है। किसानों की पहले बरसात के कारण फसले खराब हुई और अब बेमौसम बारिश ने किसानों की फसले तबाह कर दी। उन्होने दिल्ली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार कुछ तथाकथित किसानों की फोटों खींचकर जोरशोर से प्रचार-प्रसार कर किसान हितैषी होने का नाटक कर रही है जबकि हकीकत यह है कि अभी तक नजफगढ़ देहात में किसानों को कोई मुआवजा नही मिला है।

वहीं दिल्ली भाकियू के संरक्षक राज सिंह डागर ने कहा कि सरकार ने किसानों के साथ छल किया है जिसका अंजाम सरकार को भुगतना पड़ेगा। हम दिल्ली में हो रहे निगम चुनावों में केंद्र सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ सभी वार्डों में जाकर जनता को सरकार के धोखे से अवगत करायेंगे। लेकिन साथ ही उन्होने कहा कि हम न तो चुनाव लड़ेंगे और ना ही किसी पार्टी का समर्थन करेंगे हम सिर्फ किसानों के हित के लिए केंद्र व दिल्ली सरकार पर दबाव बनायेंगे।

किसान हो या जवान पर अपने विचार रखते हुए पूर्व पार्षद व वयोवृद्ध किसान नेता प्रीतम सिंह डागर ने कहा कि केंद्र सरकार अगर किसानों की सच्ची हितैषी है तो वह किसानों की सभी सब्सिडी बंद कर किसानों को एक मुश्त 5 हजार रूपये प्रति माह की पेशन योजना शुरू करे ताकि किसानों को उजड़ने व आत्महत्या से बचाया जा सके। इसके साथ ही उन्होने कहा कि आज राजनीतिक पार्टियों का उद्देश्य जनसेवा के बजाये धनसेवा हो गया है। राजनेता अब जनसेवक की बजाये राजा बन गये है। वह अपनी सुविधाओं व आराम का पूरा ख्याल रख रहे है और अपनी तनख्वाह हो या पेंशन उसको बढ़ाने के लिए सभी एकमत दिखाई देते है लेकिन जब भी जनहित के मुद्दे आते है तो या तो संसद से बहिर्गमन करते है या फिर उस पर अपना विरोध दर्शातें है जिसकारण जनता को मिलने वाले लाभ या योजनाऐं कानूनी अमली जामा नही पहन पाती और जनता उन सुविधाओं से वंचित रह जाती है। उन्होने कहा कि एक जवान अपनी पूरी उम्र देश सेवा में लगा देता है उसकी तो सरकार ने पेंशन बंद कर दी जबकि एक राजनेता जो जनसेवा के लिए आता है वह पांच साल में ही करोड़पति बन जाता है। और कई-कई पेंशन का भागी बन जाता है। आखिर राजनेताओं का यह खेल कब तक जनता सहती रहेगी। उन्होने कहा कि आज मोदी के बारे में कहा जाता है कि मोदी है तो संभव है फिर मोदी जी इस असमानता व जनसेवा को राजनेताओं पर लागू क्यों नही करते। क्या मोदी जी भी अब सिर्फ सत्ता लोलुपता के भूखे हैं। मोदी जी को देश के किसानों व जवानों के लिए सोचना चाहिए और एक पुख्ता योजना बनाकर इनका सम्मान करना चाहिए।

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