कोरोना के खिलाफ अब दूसरे देशों को भी मिलेगा आयुष का कवच

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
March 7, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

कोरोना के खिलाफ अब दूसरे देशों को भी मिलेगा आयुष का कवच

- अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने आयुर्वेद की दवाओं का दूसरे देशों को निर्यात करने का लिया फैसला - कहा- कोरोना से लड़ने में कारगर साबित हुई अश्वगंधा

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- देश में कोरोना महामारी के खिलाफ अपनी अहम भूमिका निभाने वाली आयुर्वेदिक दवा आयुष का कवच अब दूसरे देशों के नागरिकों को भी मिलने जा रहा है। इसके लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने आयुर्वेद की दवाओं का दूसरे देशों में निर्यात करने और जांची-परखी दवा के तौर पर बढ़ावा देने के लिए लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत ब्रिटेन में यह परीक्षण किया जाएगा कि कैसे अश्वगंधा कोविड-19 संक्रमण से उबरने में मदद करती है.  
                देश में कोरोना को नियंत्रित करने के लिए काफी हद तक परंपरागत चिकित्सा पद्धतियां कारगर साबित हुई हैं। योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी और होमियोपैथी पद्धतियों ने काफी हद तक लोगों को कोरोना वायरस से बिना साईड इफेक्ट के बचाव किया है। इसे देखते हुए सरकार ने आयुष को दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचाने की तैयारी कर ली है। मंत्रालय ने कंपनियों और वैश्विक इकाइयों से समझौता किया है, जिससे अब भारत में तैयार आयुष दवाइयों के माध्यम से देश महत्व बढ़ने जा रहा है।
                 आयुष मंत्रालय के जुलाई तक के उपलब्ध आंकड़ों से पुष्टि होती है कि आयुष की उपचार तकनीक कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए पर्याप्त है। केरल के आयुर रक्षा क्लीनिक नाम से बनाए 1206 केंद्रों में 3.5 लाख लोगों का इलाज हुआ। इनमें 99.96 फीसदी लोग कोविड संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो गए। जबकि तमिलनाडु और मिजोरम में इस संक्रमण से उबरने की दर 100 फीसदी तक रही। वहीं तेलंगाना में यह दर करीब 95 फीसदी थी।
                वहीं हाल ही में आयुष सचिव राजेश कोटेचा ने एक कार्यक्रम में कहा था कि अश्वगंधा किस तरह से कोविड संक्रमण से लड़ने और उससे ठीक होने में मदद करता है, इस पर बड़े स्तर पर ब्रिटेन में परीक्षण होंगे। इस क्लीनिकल परीक्षण में 2000 से अधिक लोग हिस्सा लेंगे। इससे यह जानने में काफी हद तक मदद मिल सकेगी कि अश्वगंधा को कोविड संक्रमण से लड़ने में जांची-परखी दवा के तौर पर स्थापित किया जा सकता है या नहीं। इस समय कोविड के हल्के लक्षण वाले मरीजों को दी जाने वाली दवाओं में आयुष 64 (केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित) प्रमुख है। कोटेचा ने आगे कहा था कि 29 औद्योगिक साझेदारों को यह तकनीक स्थानांतरित की जा चुकी है। यह ऐसे समय में हुआ है, जब परंपरागत दवाओं का निर्यात वर्ष 2020-21 में 1.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। आयुर्वेदिक दवाओं का कुल निर्यात मूल्य 2018-19 में 44.6 करोड़ डॉलर था। बजट में भी आयुष के लिए प्रावधानों को बढ़ाया गया है और यह वर्ष 2014-15 से करीब पांच गुना तक बढ़ चुका है। पिछले छह वर्षों में भारत में आयुर्वेद उद्योग की सालाना वृद्धि दर 17 फीसदी रही है।
                         उपलब्ध आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के ज्यादातर राज्यों में आयुष दवाओं के जरिए कोविड संक्रमण से निजात पाने की दर 90 फीसदी से अधिक रही है। कोविड-19 संक्रमण की लहर के दौरान संक्रमित लोगों के इलाज में भारत में बड़े स्तर पर आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल हुआ था। कम से कम नौ राज्यों ने आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक कोविड चिकित्सा केंद्र बनाए थे। इनमें हरियाणा, मणिपुर, मिजोरम, तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी जैसे राज्य शामिल हैं। पहले चरण में आयुष का प्रभावी इस्तेमाल करने वाले केरल में ऐसे सबसे ज्यादा 1,206 केंद्र हैं।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox