नकली नोटो की गड्डी दिखा लोगों को लूटने वाले गैंग का द्वारका पुलिस ने किया पर्दाफाश

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नकली नोटो की गड्डी दिखा लोगों को लूटने वाले गैंग का द्वारका पुलिस ने किया पर्दाफाश

-द्वारका एटीएस ने गैंग सरगना समेत 6 आरोपी दबोचे, 3 अपराधी पहले से थे पीओ घोषित

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/-कई राज्यों में भोले-भाले लोगों को नकली नोटों की गड्डी दिखा कर लूटने वाले एक कुख्यात गिरोह का द्वारका एटीएस ने भंडाफोड़ करते हुए गैंग के सरगना समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों से 4 नकली नोटो की गड्डी, 3 मोटरसाइकिल, एक खिलौना पिस्तौल व 1 लाख 16 हजार 500 रूपये नगद बरामद किये हैं। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर विभिन्न थानों में दर्ज 20 मामलों का खुलासा होने का दावा किया है। पकड़े गये आरोपियों में 3 आरोपी पहले से पीओ घोषित किये गये है।
                           इस संबंध में द्वारका डीसीपी संतोष कुमार मीणा ने बताया कि द्वारका एटीएस ने 70 किलोमीटर तक सीसीटीवी चैक कर आखिर लोगों को झांसा देकर लूटने वाले गिरोह की सदस्यों की पहचान की फिर बड़ी कार्यवाही करते हुए उन्हे दबोच लिया। उन्होने बताया कि डाबड़़ी के मुकेश मंडल ने बताया कि वह स्वास्तिक कलेक्शन कंपनी में फील्ड ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। जब वह दशरथपुरी मेट्रो स्टेशन, महावीर एन्क्लेव, डाबरी के पास स्थित एक बैंक में नकद जमा करने जा रहे थे, तो अचानक उन्हें एक व्यक्ति ने रोक लिया और उनसे बिहार की बस कहां से मिलेगी के बारे में पूछा।इसी बीच एक और व्यक्ति वहां पहुंचा और उसने यह कहते हुए बैग दे दिया कि इसमें 4 लाख रूपये हैं जो उसने एक फैक्ट्री से चुराए हैं और फैक्ट्री मालिक उसका पीछा कर रहा है। फिर उसने उनसे कुछ पैसे मांगे तो उन्होने करीब 1.16 रूपये उसे दे दिये। जिन्हे लेकर वो फरार हो गया लेकिन जब उसका बैग देखा तो उसमें नकली नोट निकले जिसके बाद उसने पुलिस में शिकायत की।
                         मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी ऑपरेशन विजय सिंह ने संज्ञान लेते हुए तुरंत निरिक्षक कमलेश कुमार के नेतृत्व में, ें एसआई विकास यादव, महिला एसआई सरोज, एएसआई रणधीर, एचसी दिनेश, एचसी जितेंद्र, एचसी सोनू, एचसी जगत सिंह, कांस्टेबल अरविंद, संदीप,  इंदरपाल,. राजेश और राजबीर की टीम को आरोपियों को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी। टीम ने जांच के दौरान तकनीकी निगरानी की मदद ली गई और दोषियों की पहचान करने के लिए टीम द्वारा आसपास के क्षेत्रों की सावधानीपूर्वक जांच की गई. तकनीकी निगरानी की मदद से टीम को यकीन हो गया कि यह अपराध उन छह लोगों ने किया है जो 04 मोटरसाइकिल पर मौके पर आए थे। इसके बाद महावीर एन्क्लेव से सागरपुर, फिर जनकपुरी और अंत में बुध विहार, रोहिणी होते हुए मंगोलपुरी, दिल्ली होते हुए अपराधियों द्वारा लिए गए रास्ते को चेक किया गया। लगभग 10 दिनों के बाद अपराधियों की वही मोटरसाइकिलें जिन्हें तकनीकी निगरानी द्वारा पहचाना गया था, उन्हें रोहिणी के बुध विहार क्षेत्र में देखा गया था। इसके बाद, संदिग्धों के बारे में जानकारी एकत्र करने के लिए बुध विहार, रोहिणी क्षेत्र में स्थानीय मुखबिरों को तैनात किया गया था।
                      सूचना पर कार्रवाई करते हुए तत्काल छापेमारी की गई और एक व्यक्ति राजेश कुमार पुत्र मिश्रीलाल निवासी मकान नंबर आर-979, मंगोलपुरी, दिल्ली को गुप्त मुखबिर के कहने पर पकड़ा गया। लगातार पूछताछ करने पर उसने मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने राजेश को गिरफ्तार किया गया इसके बाद पुलिस ने पांच आरोपी व्यक्तियों को बुध विहार, रोहिणी, दिल्ली के क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में उनकी पहचान लक्ष्मणदास उर्फ विजय पुत्र स्वर्गीय गंगा राम, लाल सिंह उर्फ लालू पुत्र स्वर्गीय पुदान सिंह, शंभु प्रताप सिंह पुत्र चित्रभुवन, जगदीश आर्य पुत्र चुन्नीलाल और कुलदीप पुत्र जगन्नाथ के रूप में हुई।
                  पूछताछ में आरोपी लक्ष्मणदास उर्फ विजय ने खुलासा किया कि वह पिछले 3-4 साल से इसी तरह के अपराधों में लिप्त है और वह पहले ही लगभग 100 ऐसे ही अपराध कर चुका है। वे 5-6 लोगों के गिरोह में काम करते हैं। नकदी निकालने के लिए बैंकों का दौरा करने वाले ग्राहक उनके मुख्य लक्ष्य थे। ऐसे ग्राहकों का उनके द्वारा पीछा किया गया और कुछ सामान्य प्रश्नों के बहाने रोक दिया गया। इसके बाद वे मनगढ़ंत कहानियां सुनाते थे जैसे वे एक कारखाने के कर्मचारी हैं लेकिन कारखाने के मालिक द्वारा उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। इसलिए, उन्होंने कारखाने के मालिक के चेक चुरा लिए हैं लेकिन उनके पास चेक जमा करने के लिए बैंक खाता नहीं है। कुछ बातचीत के बाद वे पीड़ितों को चेक के बदले कुछ रुपये देने के लिए राजी करते थे। पीड़ित जब उन्हें कुछ रुपये देने को तैयार हुए तो उन्होंने नकली नोटो की गड्डियां सौंप देते थे। पीड़ितों से पैसे लेने के बाद वो फरार हो जाते थे। कई बार जब वह मौके पर पकड़ा जाता था तो फिर उसके दूसरे साथी मौके पर पंहुचकर मामले को सुलझाते और फिर सभी फरार हो जाते। इसके लिए वह कई बार पीड़ितों को खिलौना पिस्तोल से भी धमकाते थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है ताकि और मामलों का खुलासा हो सके। हालांकि इस मामले में स्थानीय पुलिस का भी सहयोग लिया गया।

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