सोशल मीडिया पर सख्त हई सरकार, सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद एक्शन में सरकार,

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October 14, 2026

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सोशल मीडिया पर सख्त हई सरकार, सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद एक्शन में सरकार,

-सोशल मीडिया-ओटीटी के लिए अब नए नियम, 24 घंटे में हटानी होगी आपत्तिजनक पोस्ट, देश में कितने सोशल मीडिया अकांउटस इसकी नही है जानकारी

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र सरकार सोशल मीडिया कि खिलाफ पूरी तरह से हरकत में आ गई है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को सोशल मीडिया और ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म के खिलाफ सख्त रूख अपनाते हुए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। नई गाइडलाइंस के दायरे में फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और नेटफ्लिकस, ऐमजॉन प्राइम, हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म आएंगे। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए गाइडलाइंस की घोषणा की। इस दौरान एक सवाल के जवाब में जावड़ेकर ने बताया कि देश में कितने न्यूज पोर्टल संचालित हो रहे हैं, इसकी अभी तक हमारे पास जानकारी नहीं है।
केंद्र सरकार ने गुरुवार को नेटफ्लिक्स-अमेजन जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म, फेसबुक-ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये नियम आगामी तीन महीने में लागू हो जाएंगे। नए दिशानिर्देशों के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत मिलने पर उसे 24 घंटे के अंदर हटाना होगा। डिजिटल मीडिया को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह सेल्फ रेगुलेशन करना होगा। इससे पहले 13 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने सोशल मीडिया पर भ्रामक व भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने के मामले में केंद्र सरकार और ट्विटर को नोटिस जारी किया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा था कि फर्जी अकाउंट बनाकर फैलाई जा रही भ्रामक खबरें, संदेश व नफरत भरी सामग्री (कंटेंट) और विज्ञापनों को कैसे रोका जाएगा? अदालत ने हेट स्पीच और फेक न्यूज पर अंकुश लगाने के लिए देश में सोशल मीडिया को नियंत्रित कर कानून के दायरे में लाने के लिए केंद्र और अन्य को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। इसके अलावा अदालत ने सोशल मीडिया के जरिए नफरत फैलाने वाले और फेक न्यूज के प्रसार के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए अलग से कानून बनाने को कहा था।
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम ने बीते शुक्रवार को भाजपा नेता विनीत गोयनका की याचिका पर केंद्र व ट्विटर से जवाब तलब किया था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अश्विनी दुबे ने कहा था कि गणमान्य नागरिकों व सांविधानिक पद पर बैठे लोगों के नाम से ट्विटर व फेसबुक पर सैकड़ों फर्जी अकाउंट उनकी वास्तविक फोटो के साथ चल रहे हैं। इनसे नफरत व भ्रम फैलाने वाली सामग्री पोस्ट की जा रही है। आम नागरिक इनका विश्वास आसानी से कर लेते हैं।
याचिका में कहा गया था कि खासतौर से ट्विटर व उसके अधिकारी जानबूझकर भारत के खिलाफ भावनाएं भड़का रहे हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई का कानून होना चाहिए। 2019 में प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस ट्विटर पर मौजूद है और देश के खिलाफ काम कर रहा है। ट्विटर सोशल मीडिया पर सुरक्षा के लिए जो एल्गोरिथम व तर्क उपयोग करता है, उन्हें भारत सरकार से साझा करे ताकि देश विरोधी ट्वीट की स्क्रीनिंग हो सके। सोशल मीडिया हैंडल के लिए अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) अनिवार्य की जाए ताकि सोशल मीडिया सुरक्षित व अकाउंट्स जवाबदेह रहें।

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