अनीशा चौहान/- भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) में जल्द ही नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकता है। खबरों के अनुसार, वरिष्ठ क्रिकेट प्रशासक और वर्तमान उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला को बीसीसीआई का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है, जो मौजूदा अध्यक्ष रोजर बिन्नी की जगह लेंगे। बिन्नी का कार्यकाल 19 जुलाई 2025 को समाप्त हो रहा है क्योंकि बीसीसीआई के नियमों के तहत कोई भी पदाधिकारी 70 वर्ष की उम्र के बाद अपने पद पर नहीं रह सकता और बिन्नी अब इस उम्र सीमा को पार कर चुके हैं।

राजीव शुक्ला: राजनीति से लेकर क्रिकेट तक का सफर
राजीव शुक्ला का क्रिकेट और प्रशासनिक अनुभव उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बनाता है। वह 2020 से बीसीसीआई के उपाध्यक्ष हैं और इससे पहले आईपीएल चेयरमैन रह चुके हैं। इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (UPCA) के सचिव भी रह चुके हैं। एक वरिष्ठ राजनेता, पूर्व पत्रकार और कुशल प्रशासक के रूप में उनकी पहचान रही है।
खबरों की मानें तो शुक्ला सितंबर 2025 में होने वाली बीसीसीआई की वार्षिक आम बैठक (AGM) तक अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर काम करेंगे, जिसके बाद वह पूर्णकालिक अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं।
रोजर बिन्नी का कार्यकाल: उपलब्धियों से भरा
रोजर बिन्नी ने 2022 में सौरव गांगुली की जगह बीसीसीआई अध्यक्ष का पद संभाला था। उनके कार्यकाल में भारतीय पुरुष टीम ने 2024 टी20 विश्व कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जैसे दो बड़े आईसीसी खिताब अपने नाम किए। इसके अलावा, महिला प्रीमियर लीग (WPL) की शुरुआत भी उनके कार्यकाल की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, जिसने महिला क्रिकेट को एक नई पहचान दी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीसीसीआई की साख बनाए रखना चुनौती
राजीव शुक्ला की संभावित नियुक्ति के साथ ही उनके सामने बीसीसीआई को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। आईसीसी में भारत के प्रतिनिधित्व, घरेलू क्रिकेट के सुधार, और खिलाड़ियों की सुविधा व कल्याण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे उनकी प्राथमिकताओं में होंगे।
बीसीसीआई की आगामी एजीएम में न केवल नए अध्यक्ष का चुनाव, बल्कि आईसीसी प्रतिनिधि का चयन और अन्य प्रमुख नीतिगत फैसले भी लिए जा सकते हैं।
क्रिकेटप्रेमियों की उम्मीदें बढ़ीं
राजीव शुक्ला के अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों को उम्मीद है कि उनका नेतृत्व स्थिरता, पारदर्शिता और नवाचार लेकर आएगा। बीसीसीआई के इतिहास में यह बदलाव एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है, जो भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में मदद करेगा।


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