33 रूपये तक कम हो सकते है पेट्रोल के दाम, जीएसटी काउंसिल की बैठक में हो सकते है बड़े बदलाव

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33 रूपये तक कम हो सकते है पेट्रोल के दाम, जीएसटी काउंसिल की बैठक में हो सकते है बड़े बदलाव

-अगर तेल व लिक्र जीएसटी में आये तो घट सकते है दाम, केंद्र सरकार के संकेतों से बढ़ रही संभावना

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- देश में जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद से केंद्र सरकार व राज्यों सरकारों ने 2020-21 में करीब 6 लाख करोड़ का टैक्स वसूला है। लेकिन अब देश में मंहगाई चरम पर है और केंद्र सरकार पर मंहगाई को काबू में करने का भारी दबाव है जिसे देखते हुए सरकार कई उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाकर उन पर टैक्स छूट देना चाहती है। केंद्र सरकार के संकेतों व जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले जीएसटी काउंसिल के चेयरमैन के बयान से जीएसटी में तेल व लिक्र उत्पादों को शामिल कर दाम घटाये जा सकते है जिससे मंहगाई को काबू में किया जा सकता है हालांकि राज्यों के विरोध के चलते इसकी संभावना कम है लेकिन इसका खुलासा 28 व 29 जून को चंडीगढ़ में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद ही हो पायेगा। अगर ऐसा हुआ तो हकीकत मे पेट्रोल के दाम 33 रूपये कम व बीयर के दाम 17 रूपये घट जायेंगे।  

भारत में जीएसटी लागू हुए पांच साल पूरे हो चुके हैं। 28 और 29 जून को चंडीगढ़ में जीएसटी काउंसिल की बैठक है। इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।  जीएसटी काउंसिल की मीटिंग से पहले पीएम मोदी के आर्थिक सलाहकार परिषद् के चेयरमैन विवेक देवरॉय ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने की सम्भावना जताई है! विवेक देवरॉय ने इस बात पर भी हामी भरी है कि पेट्रोल डीजल के जीएसटी में आते ही महंगाई पर लगाम लग सकती है। हालांकि जीएसटी लागू होने के समय से ही पेट्रोल-डीजल को इससे बहार रखा गया है। क्योंकि केंद्र और राज्य सरकार को दोनों को खजाना खाली होने के डर से इसे शामिल नहीं करना चाहती सरकार। आरबीआई के मुताबिक पेट्रोल डीजल के बाद राज्यों की सबसे ज्यादा आमदनी शराब से ही होती है। 100 रूपये की शराब पर सरकार करीब 35 से 40 रूपये जीएसटी लगाती है। जिससे सरकारों को भारी टैक्स प्राप्त होता है।

परिषद की बैठक छह महीने बाद हो रही है। बैठक में दर को युक्तिसंगत बनाने के अलावा विपक्ष शासित राज्य राज्यों को क्षतिपूर्ति के भुगतान पर गर्मागर्म चर्चा कर सकते हैं। कर दरों पर आधिकारियों की समिति या फिटमेंट कमेटी द्वारा प्रस्तावित दरों पर विचार किया जाएगा। समिति ने कृत्रिम अंगों और आर्थोपेडिक प्रत्यारोपण पर एक समान पांच प्रतिशत जीएसटी दर लागू करने की सिफारिश की है। समिति ने रोपवे यात्रा पर जीएसटी दर को वर्तमान में 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की भी सिफारिश की है।

राज्यों की क्षतिपूर्ति का मुद्दा भी उठेगा
इसके अलावा ओस्टोमी उपकरणों पर जीएसटी दर को वर्तमान में 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर जीएसटी दरों पर एक स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा, जिसके मुताबिक ईवी, चाहे बैटरी से लैस हों या नहीं, पर पांच प्रतिशत की दर से टैक्स लगेगा। जीएसटी परिषद में राज्यों के वित्त मंत्रियों के समूह की दो रिपोर्टें भी पेश की जाएंगी। जीएसटी परिषद की बैठक में विपक्ष शासित राज्य राजस्व घाटे की क्षतिपूर्ति को जारी रखने की पुरजोर वकालत करेंगे। दूसरी ओर केंद्र ऐसे किसी कदम को तंग राजकोषीय स्थितियों का हवाला देते हुए रोकना चाहेगा। जीएसटी (माल एवं सेवा कर) क्षतिपूर्ति कोष में कमी को पूरा करने के लिए केंद्र ने 2020-21 में 1.1 लाख करोड़ रुपये और 2021-22 में 1.59 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया और राज्यों को जारी किया। उपकर संग्रह में कमी की वजह से ऐसा किया गया।
आइए अब इस पोल में हिस्सा लेते हैं…

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