23 मार्च को जंतर-मंतर पर अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों और परिवारों का धरना प्रस्तावित

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 4, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ‘ए’ सर्विस का दर्जा, समयबद्ध का पदोन्नति विरोध

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   नई दिल्ली में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों और उनके परिवारों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। इस संबंध में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय को नोटिस भेजते हुए 23 मार्च को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से उन्हें सेवा से जुड़े कई मुद्दों पर उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते अब उन्हें अपनी आवाज बुलंद करने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के करीब 13 हजार कैडर अधिकारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। इनमें सहायक कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट, सेकेंड-इन-कमांड, कमांडेंट, डीआईजी और आईजी रैंक तक के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें समयबद्ध पदोन्नति नहीं मिल रही है, जिसके कारण उनके करियर और भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।

एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह द्वारा जारी बयान में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 23 मई 2025 को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कैडर अधिकारियों को ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ‘ए’ सर्विस का दर्जा देने का आदेश दिया था। इस फैसले के तहत अधिकारियों को समयबद्ध पदोन्नति देने, आईपीएस अधिकारियों की संख्या को चरणबद्ध तरीके से कम करने और सेवा शर्तों में सुधार जैसे प्रावधान शामिल थे। हालांकि अधिकारियों का आरोप है कि इस फैसले को लागू करने के बजाय सरकार अब विधायी हस्तक्षेप के जरिए जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2026 लाने की तैयारी कर रही है, जिससे सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असर पड़ सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति की व्यवस्था इतनी धीमी है कि कई बार एक पद से दूसरे पद पर पहुंचने में 15 से 20 साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ता है। यही स्थिति निचले स्तर के जवानों जैसे सिपाही, हवलदार, सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर के साथ भी बनी हुई है। लंबे समय तक पदोन्नति न मिलने और सेवा से जुड़ी समस्याओं के कारण हर साल बड़ी संख्या में जवान और अधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या इस्तीफा देने को मजबूर हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि बीते कई वर्षों से हर साल करीब दस हजार जवान और अधिकारी सेवा छोड़ रहे हैं।

पूर्व एडीजी सीआरपीएफ एच.आर. सिंह के हवाले से कहा गया है कि अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के लिए अब जंतर-मंतर जैसे लोकतांत्रिक मंच ही बचते हैं। इसी को देखते हुए एसोसिएशन ने पूर्व अर्धसैनिक बलों के जवानों, अधिकारियों और उनके परिवारों से अपील की है कि वे 23 मार्च को जंतर-मंतर पहुंचकर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन में भाग लें और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाएं।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox