“2024 माइल रनिंग चैलेंज“ में बीआरजी धावकों का कमाल

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January 19, 2026

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“2024 माइल रनिंग चैलेंज“ में बीआरजी धावकों का कमाल

-नवीन राणा ने लगातार 1600 दिनों तक दौड़ का बनाया रिकार्ड -गुलाब सिंह और शरनम सिह ने 365 दिन के चैलेंज में पुरे भारत में हासिल किया पहला व दूसरा स्थान

बहादुरगढ़/शिव कुमार यादव/- प्रतियोगिताओं में लगातार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहा बहादुरगढ़ रनर्स ग्रुप (बीआरजी) अब एक ऐसा प्रेरणादायक मंच बन गया है, जहां हर तरह के धावक अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। बहादुरगढ़ रनर्स ग्रुप के धावक नवीन राणा ने लगातार 1600 दिनों तक दौड़ कर, तो “2024 माइल रनिंग चैलेंज“ मे गुलाब सिंह और शरनम सिंह ने 365 दिन के चैलेंज में पुरे भारत में पहला व दूसरा स्थान हासिल कर समाज में फिटनेस का संदेश दिया है।

इस संबंध में दीपक छिल्लर ने बताया बीआरजी ग्रुप न केवल फिटनेस और दौड़ के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करता है, बल्कि इसमें शामिल धावक अपनी-अपनी खासियतों के साथ दूसरों को प्रेरित भी करते हैं।

ग्रुप की विविधताः
1. लंबी दौड़ के विशेषज्ञः ग्रुप में ऐसे धावक शामिल हैं जो मैराथन और अल्ट्रामैराथन जैसे कठिन और लंबी दूरी के इवेंट्स में अपना लोहा मनवा रहे हैं।
2. तेज गति के धावकः कुछ धावक छोटी दूरी की दौड़ में अपनी तेज रफ्तार और उत्कृष्ट तकनीक के लिए जाने जाते हैं।
3. नियमितता के प्रतीकः नवीन राणा जैसे धावक, जो बिना किसी दिन की छुट्टी के लगातार दौड़ रहे हैं, “2024 माइल रनिंग चैलेंज“ में गुलाब सिंह और शरनम सिंह ने 365 दिन के चैलेंज में पूरे भारत में पहला व दूसरा स्थान हासिल कर नियमितता और अनुशासन का शानदार उदाहरण पेश करते हैं।

दीपक छिल्लर ने जानकारी देते हुए बताया कि बहादुरगढ़ रनर्स ग्रुप (बीआरजी) के धावक नवीन राणा ने अपनी अनूठी उपलब्धि से सभी को प्रेरित किया है। लगातार 1600 दिनों तक दौड़ने का उनका यह सफर 5 जनवरी 2025 को पूरा हुआ। यह यात्रा उन्होंने 6 जून 2019 से शुरू की थी और तब से लेकर अब तक बिना किसी दिन का अवकाश लिए वह प्रतिदिन दौड़ रहे हैं। इस सफर को पूरी उम्र नियमित रूप से निभाने वाले है।

नवीन राणा की उपलब्धियां इन 1600 दिनो मे :
1. कुल दौड़ः 16550 किलोमीटर
2. कुल वॉकिंगः 2975 किलोमीटर
3. अल्ट्रामैराथनः 5 बार (प्रत्येक 50 किलोमीटर)
4. फुल मैराथनः 15 बार (प्रत्येक 42.2 किलोमीटर)
5. हाफ मैराथनः 240 बार (प्रत्येक 21.1 किलोमीटर)
6. दैनिक औसतः 10 किलोमीटर से अधिक
7. अधिकतम दूरीः 63 किलोमीटर एक दिन में
8. न्यूनतम दूरीः 3 किलोमीटर

वही 100 डेज आफ रनिंग द्वारा 365 दिन के “2024 माइल रनिंग चैलेंज“ मे गुलाब सिंह ने पूरे साल में 5100 किलोमीटर की दौड लगाकर पूरे भारत मे टॉप किया है। वहीं शरनम सिंह बघेल ने पूरे भारत मे दूसरा स्थान हासिल कर बहादुरगढ शहर का और बीआरजी ग्रुप का प्रचम लहराया है।

गुलाब सिंह ( पहला स्थान)
कुल दौड़ः 5449 किलोमीटर
कुल समयः 678 घंटे

शरनम सिंह बघेल (दूसरा स्थान)
कुल दौड़ः 5450 किलोमीटर
कुल समयः 667 घंटे

दिनचर्या और प्रेरणाः
नवीन राणा, गुलाब सिंह, शरनम सिंह बघेल ने इस उपलब्धि के दौरान खराब मौसम, स्वास्थ्य या अन्य रुकावटों के बावजूद अपनी दौड़ को जारी रखा। उनके इस अनुशासन ने उन्हें ग्रुप में सबसे नियमित धावक का खिताब दिलाया है और ये सभी अपने ग्रुप व समुदाय के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।

दौड़ने के फायदेः
नवीन राणा, गुलाब सिंह व शरनम सिंह बघेल के अनुभव और सफलता से यह स्पष्ट होता है कि सुबह दौड़ने के नियमित अभ्यास से जीवन में कई लाभ मिल सकते हैं, जैसेः
-शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार
-आत्म-नियंत्रण और अनुशासन का विकास
-दिनभर के लिए ताजगी और ऊर्जा
-समाज से जुड़ने का अवसर

नवीन राणा का यह सफर यह दिखाता है कि इच्छाशक्ति और नियमितता से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। वही गुलाब सिंह और शरनम सिंह बघेल का यह जज्बा और समर्पण ही पुरे भारत मे पहला और दुसरा स्थान लेकर अन्य धावकों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

ग्रुप से कर्नल बधवार, नवनीत दलाल, जगदीश राठी, सुचेत सिंह, सुरेंद्र दलाल, परवीन सांगवान, दीपक, शलभ, शरनम, नरेश शर्मा, धर्मवीर, आर के मोर, सुनील बेनीवाल, गुलाब, बह्मप्रकाश मान, सागर, कृष्ण, रणबीर सांगवान, शक्ति राणा, विजय और अन्य सभी ग्रुप मैम्बरो ने इस उपलब्धी के लिए तीनो को ढेर सारी शुभकामनाए दीं

ग्रुप का महत्वः
यह ग्रुप केवल एक रनिंग प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और फिटनेस के प्रति जागरूकता फैलाने का माध्यम भी है। हर धावक अपनी खासियत और अनुशासन के जरिए न केवल ग्रुप बल्कि पूरे समाज को प्रेरणा दे रहा है। एकजुटता और सकारात्मकता के इस माहौल में नए धावकों को भी प्रोत्साहन मिलता है। बहादुरगढ़ रनर्स ग्रुप का यह जुनून और जज्बा दिखाता है कि दौड़ सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और समुदाय के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

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