हाउस टैक्स और शहरी नियमों के खिलाफ एकजुट हुआ दिल्ली पंचायत संघ

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September 18, 2026

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नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     दिल्ली के गांवों पर लगाए गए हाउस टैक्स और नगर निगम के अन्य शहरी नियमों को लेकर दिल्ली पंचायत संघ ने कड़ा रुख अपनाया है। राजधानी में आयोजित पंचायत संघ प्रमुखों की एक अहम बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर नगर निगम द्वारा गांवों पर थोपे गए हाउस टैक्स, कन्वर्जन चार्ज, पार्किंग शुल्क और अन्य तथाकथित शहरी प्रावधानों को समाप्त करने की मांग की गई। पंचायत संघ का कहना है कि इन नियमों से ग्रामीण जीवन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और गांवों की मूल संरचना प्रभावित हो रही है।

शीर्ष नेतृत्व को ज्ञापन, समाधान की मांग
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, महापौर सरदार इकबाल सिंह, उपमहापौर जयभगवान यादव और दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा को ज्ञापन सौंपा जाएगा। पंचायत संघ प्रतिनिधि इन नेताओं से मुलाकात कर गांवों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएंगे और ठोस समाधान की मांग करेंगे।

भाजपा सरकार से ग्रामीणों को बड़ी उम्मीदें
दिल्ली पंचायत संघ के प्रमुख थान सिंह यादव ने कहा कि वर्तमान समय में दिल्ली में नगर निगम और विधानसभा—दोनों में भाजपा की सरकार है, ऐसे में गांवों और किसानों को आशा है कि लंबे समय से लंबित उनकी समस्याओं का अब स्थायी समाधान निकलेगा। उन्होंने कहा कि गांवों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां शहरी क्षेत्रों से पूरी तरह अलग हैं, फिर भी नगर निगम द्वारा गांवों पर शहरों जैसे नियम लागू करना अन्यायपूर्ण है।

शहरी टैक्स से बढ़ा ग्रामीणों पर बोझ
थान सिंह यादव ने आरोप लगाया कि हाउस टैक्स, कन्वर्जन चार्ज और अन्य शुल्कों ने ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया है। इसके अलावा भवन उपनियमों के कारण गांवों में मकान निर्माण और मरम्मत के दौरान नोटिस और कार्रवाई की समस्या भी बढ़ गई है, जिससे ग्रामीण लगातार मानसिक और आर्थिक दबाव में हैं।

पंचायत संघ की प्रमुख मांगें
दिल्ली पंचायत संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि राजधानी के सभी गांवों को हाउस टैक्स सहित नगर निगम के सभी प्रकार के करों से पूरी तरह मुक्त किया जाए। साथ ही गांवों को दिल्ली नगर निगम के भवन उपनियमों से बाहर रखा जाए, ताकि ग्रामीणों को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े। पंचायत संघ ने गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सभी गांवों को व्यावसायिक श्रेणी में अधिसूचित करने और वर्षों से सील या बुक की गई संपत्तियों को तत्काल खोलने की भी मांग की है।

18 सूत्री मांगों को लेकर महापंचायत की तैयारी
पंचायत संघ ने यह भी ऐलान किया कि दिल्ली देहात, गांव, ग्रामीण और किसानों की 18 सूत्री प्रमुख मांगों को लेकर जल्द ही एक बड़ी महापंचायत आयोजित की जाएगी। संघ का कहना है कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में विकास, विश्वास और संतोष का नया माहौल बनेगा।

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