हरियाणा के बाद उत्तराखंड में अर्धसैनिक कल्याण परिषद का गठन, शासनादेश जारी

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 7, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

देहरादून/उमा सक्सेना/-  हरियाणा के बाद उत्तराखंड देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहां अर्धसैनिक बलों के कल्याण के लिए अर्धसैनिक कल्याण परिषद के गठन को लेकर औपचारिक शासनादेश जारी किया गया है। उत्तराखंड सरकार के इस फैसले को पूर्व अर्धसैनिक बलों और उनके परिवारों के लिए नए साल का बड़ा तोहफा माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक पहल पर अलॉइंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया है।

लंबे संघर्ष के बाद मिली बड़ी सफलता
अलॉइंस महासचिव रणबीर सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय वर्षों से चले आ रहे संघर्ष का सुखद परिणाम है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अर्धसैनिक बलों के परिवारों की संख्या कई मायनों में सेना से भी अधिक है, बावजूद इसके उनकी समस्याओं और मांगों को लंबे समय तक पर्याप्त रूप से नहीं सुना गया। ऐसे में सरकार का यह कदम अर्धसैनिक परिवारों के लिए उम्मीद और सम्मान का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री के आश्वासन का हुआ पालन
रणबीर सिंह ने याद दिलाया कि 3 दिसंबर 2025 को ग्रुप सेंटर सीआरपीएफ काठगोदाम में आयोजित पूर्व अर्धसैनिकों के सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया था। उस सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने खुद को एक सैनिक का बेटा बताते हुए कहा था कि वे अर्धसैनिकों की कठिनाइयों को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने पूर्व अर्धसैनिकों को “भूतपूर्व नहीं, बल्कि अभूतपूर्व” बताते हुए उनके योगदान को राष्ट्र के लिए अमूल्य करार दिया था।

शासनादेश के तीन प्रमुख बिंदु
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 5 जनवरी को जारी शासनादेश में अर्धसैनिकों के हित में तीन अहम निर्णय शामिल किए गए हैं।
पहला, राज्य में अर्धसैनिक कल्याण परिषद को पुनः सक्रिय किया जाएगा और इसके लिए पुलिस मुख्यालय में एक अलग कार्यालय कक्ष आवंटित किया जाएगा।
दूसरा, सैनिक कल्याण निदेशालय में डिप्टी डायरेक्टर (अर्धसैनिक) का पद और बड़े जिलों के सैनिक कल्याण कार्यालयों में सहायक जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के पद सृजित किए जाएंगे। इन पदों पर सेवानिवृत्त अर्धसैनिक कर्मियों की संविदा के आधार पर नियुक्ति की जाएगी।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण निर्णय वीरता पुरस्कार प्राप्त अर्धसैनिकों के लिए है। राष्ट्रपति पुलिस पदक और अन्य गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित अर्धसैनिकों को राज्य सरकार की ओर से एकमुश्त 5 लाख रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी।

नेतृत्व और प्रयासों की सराहना
अलॉइंस अध्यक्ष एवं पूर्व एडीजी एच.आर. सिंह ने इस ऐतिहासिक फैसले का श्रेय पूर्व आईजी बीएसएफ एस.एस. कोठियाल के अथक प्रयासों और कुशल नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि यह घोषणा पूर्व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से जुड़े उत्तराखंडवासियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड की इस पहल से अन्य राज्य सरकारें भी प्रेरणा लेंगी और अर्धसैनिक बलों के कल्याण के लिए इसी तरह के शासनादेश जारी करेंगी।

उत्तराखंड सरकार का यह कदम न केवल अर्धसैनिक बलों के योगदान को सम्मान देने वाला है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत संदेश भी देता है।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox