सुप्रीम कोर्ट ने ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991’ की वैधता पर सुनवाई टाली, केंद्र को 4 हफ्ते का समय

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 4, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

सुप्रीम कोर्ट ने ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991’ की वैधता पर सुनवाई टाली, केंद्र को 4 हफ्ते का समय

अनीशा चौहान/- सुप्रीम कोर्ट में ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991’ के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं की सुनवाई से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने इस मामले में कहा कि जब तक केंद्र सरकार का जवाब दाखिल नहीं हो जाता, तब तक इस पर सुनवाई नहीं होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र ने अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया है, जिसके बाद सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि जवाब जल्द ही दाखिल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक इस मामले से जुड़ी कोई नई याचिका दायर नहीं की जा सकेगी।

केंद्र को 4 हफ्ते का समय, अगले आदेश तक कोई नई याचिका नहीं दायर की जा सकेगी

सीजेआई संजीव खन्ना ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्तों का समय दिया। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र का जवाब नहीं आता, तब तक सुप्रीम कोर्ट इस पर कोई निर्णय नहीं ले सकता। इसके बाद, जिन पक्षों को जवाब दाखिल करना हो, वे चार हफ्तों में अपने जवाब दाखिल कर सकते हैं। सीजेआई ने यह भी कहा कि इस मामले से जुड़े अन्य अदालतों में चल रहे मुकदमों पर कोई अंतिम आदेश नहीं दिए जाएंगे और न ही किसी प्रकार का सर्वेक्षण करने का आदेश जारी किया जाएगा।

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 का महत्व

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991, धार्मिक स्थलों की स्थिति को 15 अगस्त 1947 के आधार पर संरक्षित करता है और उसमें बदलाव करने पर रोक लगाता है। हालांकि, इस अधिनियम में अयोध्या विवाद को बाहर रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जाएगी।

ज्ञानवापी, शाही ईदगाह और शाही जामा मस्जिद मामले पर असर

इस मामले की सुनवाई वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद और संभल में शाही जामा मस्जिद से जुड़े मुकदमों की पृष्ठभूमि में हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विभिन्न अदालतों में चल रहे ऐसे मामलों में कोई भी अंतिम आदेश जारी नहीं किया जाएगा और न ही इन मसलों पर सर्वेक्षण के आदेश दिए जाएंगे।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox