सीमा विवाद से सुलह की ओर बढ़े कदम, आतंकवाद पर भारत-चीन की एकजुटता

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September 5, 2026

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सीमा विवाद से सुलह की ओर बढ़े कदम, आतंकवाद पर भारत-चीन की एकजुटता

-भारत और चीन की नई साझेदारी

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  रविवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने तिआनजिन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अहम मुलाकात की। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि यह दोनों नेताओं की एक साल से कम समय में दूसरी भेंट थी, पहली मुलाकात अक्टूबर 2024 में कजान में हुई थी। इस दौरान दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए रणनीतिक दिशानिर्देश तय किए थे।

तिआनजिन में मोदी ने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया और शांति व स्थिरता को संबंधों की प्रगति का आधार बताया। साथ ही, उन्होंने जिनपिंग को 2026 में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया।

बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और चीन को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि साझेदार मानने पर सहमति जताई। मिसरी के अनुसार, जिनपिंग ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रस्ताव रखे, जिनका मोदी ने स्वागत किया। दोनों ने मतभेदों को विवाद में न बदलने और 2.8 अरब लोगों के हित में स्थिर संबंधों पर जोर दिया। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर चर्चा हुई, जिसमें व्यापार घाटा कम करने, निवेश को सुगम बनाने और नीतिगत पारदर्शिता बढ़ाने पर बल दिया गया। इसके अलावा, बहुध्रुवीय एशिया के निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

चेयरमैन सीनियर जनरल मिन आंग ह्लाइंग से मिले मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के स्टेट सिक्योरिटी एंड पीस कमीशन के चेयरमैन सीनियर जनरल मिन आंग ह्लाइंग से भी मुलाकात की। उन्होंने म्यांमार में चुनावों की घोषणा का स्वागत करते हुए संवाद को शांति का एकमात्र रास्ता बताया। भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत म्यांमार के साथ विकास साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। मोदी ने संपर्क परियोजनाओं के लिए सहयोग मांगा और सुरक्षा व सीमा मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें संवाद को स्थिरता का आधार बताया।

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