साइबर ठगी के लिए म्यूल बैंक अकाउंट सप्लाई करने वाले दो अंतरराज्यीय गिरोहों का भंडाफोड़

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साइबर ठगी के लिए म्यूल बैंक अकाउंट सप्लाई करने वाले दो अंतरराज्यीय गिरोहों का भंडाफोड़

-शिकायत से खुलासा: पार्ट-टाइम जॉब स्कैम का मामला

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     उत्तर जिला साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक अकाउंट सप्लाई करने वाले दो संगठित अंतरराज्यीय गिरोहों का पर्दाफाश किया है। ऑपरेशन CY-HAWK 2.0 के तहत की गई इस कार्रवाई में ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, पार्ट-टाइम जॉब स्कैम, डिजिटल अरेस्ट और बड़े पैमाने पर वित्तीय ठगी में शामिल कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह देशभर में लोगों को ठगने के लिए सोशल मीडिया और परतदार बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा था।

पहला मामला दिल्ली के मालका गंज निवासी और डीयू के छात्र सुमन कुमार की शिकायत से सामने आया। शिकायतकर्ता को व्हाट्सऐप के जरिए पार्ट-टाइम जॉब का ऑफर मिला और फिर उसे टेलीग्राम चैनल से जोड़ा गया। शुरुआत में छोटे भुगतान कर भरोसा जीता गया और बाद में ‘पेड टास्क’ के नाम पर अलग-अलग खातों में कुल 93 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। पैसे की और मांग होने पर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया।

बैंक ट्रेल से सामने आया संगठित साइबर सिंडिकेट
दूसरे मामले में NCRP पोर्टल पर आई कई शिकायतों के तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि ठगी की रकम कुछ कॉमन म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए घुमाई जा रही थी। SBI बुराड़ी शाखा के एक खाते की जांच में यह साफ हुआ कि कई साइबर अपराधों की राशि इसी खाते से होकर गुजर रही थी। जांच में पांच अलग-अलग मामलों से इसका संबंध सामने आया, जिससे संगठित साइबर गिरोह की पुष्टि हुई।

तकनीकी जांच और छापेमारी के बाद गिरफ्तारी
उत्तर जिला साइबर पुलिस ने 100 से अधिक मोबाइल नंबरों की CDR, IMEI डेटा, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल फॉरेंसिक जांच की। लगातार निगरानी के बाद आरोपियों की लोकेशन दिल्ली, गाजियाबाद, गुरुग्राम और जयपुर में ट्रेस की गई। इसके बाद कई स्थानों पर छापेमारी कर 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 8 मोबाइल फोन, 8 सिम कार्ड और अहम डिजिटल सबूत भी बरामद किए हैं।

पूछताछ में खुला म्यूल अकाउंट नेटवर्क
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी बैंक खाते खुलवाकर उनके नेट बैंकिंग डिटेल, सिम और पासवर्ड अन्य साइबर अपराधियों को बेचते थे। कुछ आरोपी टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के जरिए विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे और ठगी की रकम को ATM, चेक और क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदलकर आगे ट्रांसफर करते थे। इस पूरे नेटवर्क में हर लेन-देन पर कमीशन तय था।

सोशल मीडिया और क्रिप्टो के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग
गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कर अकाउंट प्रोवाइडर, खरीदार और हैंडलर से संपर्क करता था। ठगी की रकम को पहले म्यूल अकाउंट्स में डाला जाता, फिर निकालकर क्रिप्टो में बदला जाता था, जिससे पैसों की ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।

आगे भी जारी रहेगी जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह बड़े स्तर पर सक्रिय था और इसके अन्य नेटवर्क व विदेशी लिंक की जांच की जा रही है। साइबर थाना उत्तर जिला की टीमें आगे भी इस मामले में गहराई से जांच कर रही हैं।

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