नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- उत्तरी जिले के साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने एक अंतरराज्यीय साइबर जालसाजी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो खुद को साइबर अफसर बताकर “डिजिटल गिरफ्तारी” की धमकी देकर मासूम लोगों से मोटी रकम वसूल रहा था। इस गिरोह ने हाल ही में एक बीएसएनएल से सेवानिवृत्त व्यक्ति से ₹14 लाख की ठगी की है।
ठगी का तरीका:
पीड़ित कैलाश कुमार मीणा (उम्र 57), निवासी किशनगंज, दिल्ली को व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को “साइबर क्राइम विभाग, बॉम्बे” का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि मीना का बैंक खाता साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल हुआ है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। डर के मारे पीड़ित ने कॉलर के निर्देश पर अलग-अलग खातों में ₹14 लाख ट्रांसफर कर दिए।
जांच और गिरफ़्तारी:
डीसीपी राजा बांठिया ने मामले के संदर्भ में बताया कि इंस्पेक्टर मनीष कुमार की अगुवाई में एक विशेष टीम बनाई गई जिसमें HC विनीत, HC राजेंद्र, और कांस्टेबल कुलदीप शामिल थे। टीम ने इंस्पेक्टर रोहित गहलोत (SHO) और ACP रतन पाल के निर्देशन में तकनीकी विश्लेषण और मोबाइल-बैंक डेटा की मदद से राजस्थान के बाड़मेर से दो आरोपियों — बंशी लाल और प्रेम कुमार — को गिरफ्तार किया है।
ठोस सुराग और खुलासे:
. आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पैसों के बदले फर्जी बैंक खाते और नेट बैंकिंग की जानकारी गिरोह को सौंपी।
. पूछताछ में सामने आया कि प्रेम कुमार एक प्रमुख साजिशकर्ता था, जो गिरोह को बैंक खातों की आपूर्ति करता था।
. ठगी गई राशि को चेक से निकालकर हवाला नेटवर्क के ज़रिए आगे पहुंचाया जाता था।
. बैंक एटीएम से पैसे निकालते समय CCTV से बचने के लिए एटीएम कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया गया।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी अधिकारी या एजेंसी वीडियो कॉल पर कभी गिरफ्तारी की सूचना नहीं देती। इस तरह के कॉल से सावधान रहें, किसी अंजान खाते में पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करें।


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