सत्ता परिवर्तन का दावा करने वाली NCP का चुनाव में बुरा हाल, महज 6 सीटें मिलीं

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 4, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

सत्ता परिवर्तन का दावा करने वाली NCP का चुनाव में बुरा हाल, महज 6 सीटें मिलीं

-छात्र नेताओं की पार्टी NCP का बांग्लादेश चुनाव में बुरा हाल

बांग्लादेश/सिमरन मोरया/-  बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्र नेताओं की पार्टी की हालत पतली है। छात्र नेताओं ने मोहम्मद यूनुस के निर्देश पर नेशनल सिटीजन पार्टी यानि NCP नाम से एक पार्टी बनाई थी। इनका मानना था कि वो देश में नई सरकार का गठन करेंगे। माना जाता है कि इन्हें अमेरिका और ब्रिटिश एजेंसियों का समर्थन हासिल था। मोहम्मद यूनुस को इसीलिए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का प्रमुख भी बनाया गया था। लेकिन छात्र नेताओं की पार्टी चुनाव में चारों खाने चित हो गई है। बांग्लादेश में 300 संसदीय सीटों में 299 सीटों पर चुनाव हुए थे और छात्र नेताओं की पार्टी को सिर्फ 6 सीटें मिले हैं।

खबर लिखे जाने तक नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। पार्टी ने जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन किया था और सिर्फ 30 सीटों पर ही चुनाव लड़ी थी। बांग्लादेश में चुनाव एनालिस्ट का कहना है कि असल में NCP की स्थिति शेख हसीना की सरकार के पतन के कुछ ही महीनों के बाद खराब होने लगी थी। फिर छात्र नेताओं को जमात से हाथ मिलाने का आदेश दिया गया था, ताकि जमात को चुनावी फायदा हो सके। लेकिन NCP बुरी तरह से हारी है और इसके साथ ही बांग्लादेश में अमेरिका और पश्चिमी देशो का छात्र नेताओं को सरकार में इंस्टॉल करने का प्रोजेक्ट भी फ्लॉप हो गया है।

छात्र नेताओं की पार्टी NCP का बांग्लादेश चुनाव में बुरा हाल
शुरुआती आधिकारिक और अनौपचारिक नतीजों के मुताबिक NCP सिर्फ 3 से 6 सीटों के आसपास सिमटती दिख रही है। पार्टी के प्रमुख चेहरे और छात्र आंदोलन के नायक नाहिद इस्लाम ने ढाका-11 सीट से जीत दर्ज की है। इसके अलावा रंगपुर-4 से अख्तर हुसैन की जीत भी चर्चा में रही। नाहिद इस्लाम सिर्फ 2,039 वोट से जीते हैं। वहीं अतीकुर रहमान, जो कुरीग्राम-2 से चुनाव लड़ रहे थे, उन्होंने 178,869 वोटों के साथ जीत हासिल की है। उन्होंने BNP उम्मीदवार को हराया है।
ढाका-8 में NCP के नसीरुद्दीन पटवारी को BNP के मिर्जा अब्बास से कड़ी टक्कर मिली, वे लगभग 5,000 वोटों से पीछे हैं। लक्ष्मीपुर-1 में NCP उम्मीदवार मोहम्मद महबूब आलम, जो छात्र प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा था, उन्हें सिर्फ 59,265 वोट मिले और वो चुनाव हार गये हैं।
बांग्लादेश में गुरुवार को हुए चुनाव में सिर्फ 40 से 55 प्रतिशत के बीच वोटिंग हुई है। कुल वोटिंग प्रतिशत करीब 48 प्रतिशत ही रहने का अनुमान है। जिससे पता चलता है कि शेख हसीना की पार्टी, जिसके पास करीब 40 प्रतिशत वोट बैंक है, उन्होंने चुनाव में बड़े पैमाने पर भाग ही नहीं लिया है। जबकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को 200 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं। तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। लेकिन अगर सिर्फ 48 प्रतिशत ही वोट डाले गये हैं, इसका मतलब साफ है कि देश के एक बड़े हिस्से ने वोटिंग में हिस्सा ही नहीं लिया है और ये ठीक वैसा ही है, जैसा शेख हसीना के कार्यकाल में होता था, जब BNP चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही थी। मतलब, देश का एक बड़ा हिस्सा अभी भी असंतुष्ट रहेगा, जो लोकतंत्र के लिहाज से सही नहीं है।

छात्र नेताओं की पार्टी का बुरा हाल होने का क्या है मतलब
छात्र नेताओं की पार्टी NCP ने जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन किया था। जिसके बाद पार्टी में झगड़ा शुरू हो गया। ज्यादातर महिला नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। वहीं, छात्र नेताओं के बीच भी खुद को बड़े नेता के तौर पर प्रोजेक्ट करने की होड़ लगी थी, इससे भी पार्टी का भारी नुकसान हुआ। हर छात्र नेता खुद को टीवी पर ज्यादा से ज्यादा दिखाकर मुंह चमकाने में व्यस्त थे और उन्होंने सही से कैम्पेन तक नहीं चलाया। वो अपनी

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox