संत कबीर के संदेश से जुड़े वैश्विक सद्भाव के सूत्र, देवास में आरजेएस पॉजिटिव ब्रांच गठन की पहल तेज

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 18, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-520वें आयोजन में ‘ग्रंथ-06’ का विमोचन                   -कबीर लोक गायकों को दिल्ली में मिलेगा अंतरराष्ट्रीय सम्मान

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   मानव एकता, सद्भाव और सकारात्मक संवाद के उद्देश्य से आयोजित विशेष कार्यक्रम में ‘राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस’ (आरजेएस पीबीएच) और आरजेएस पॉजिटिव मीडिया ने मध्य प्रदेश के देवास में अपनी नई शाखा स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित ‘अंतरराष्ट्रीय मानव बंधुत्व दिवस’ और ‘विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह’ के अवसर पर आयोजित इस पहल के तहत एक हाइब्रिड वेबिनार के माध्यम से संत कबीर की शिक्षाओं को समाज में फैलाने का संकल्प दोहराया गया। कार्यक्रम के दौरान आरजेएस के 520वें आयोजन में ‘ग्रंथ-06’ पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया।

कबीर वाणी से सकारात्मकता का संदेश
‘संत कबीर की अमृतवाणी में कर्म और भक्ति दर्शन’ विषय पर आयोजित वेबिनार में देवास के प्रसिद्ध कबीर लोक गायक दयाराम सारोलिया और करण सिंह पोरवाल ने भजनों व लोक गायन के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया। करण सिंह पोरवाल ने कहा कि जीवन को दिशा देने में माता-पिता, गुरु और समाज तीन प्रमुख स्तंभ हैं, जिनसे व्यक्ति संस्कार और सीख प्राप्त करता है। उन्होंने यह भी बताया कि आरजेएस मंच क्षेत्रीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कर्म और श्रद्धा का संतुलन ही कबीर का दर्शन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा (सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन) ने कबीर के दर्शन की व्याख्या करते हुए कहा कि कबीर ने कर्म और भक्ति को समान महत्व दिया। उनके अनुसार परिश्रम और आस्था एक-दूसरे के पूरक हैं, जो समाज को मजबूत आधार देते हैं। उन्होंने कबीर के विचारों को आज के दौर में भी प्रासंगिक बताया।

राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सुधार के प्रतीक कबीर
अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार डॉ. हरी सिंह पाल ने कबीर की शिक्षाओं को राष्ट्रीय एकता का सूत्रधार बताते हुए उनके वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सदियों पहले भी कबीर के विचारों का अनुवाद विदेशों में हुआ, जिससे उनकी सार्वभौमिकता सिद्ध होती है। वहीं लोक गायक दयाराम सारोलिया ने कबीर को सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाने वाला सुधारक बताया। उन्होंने मगहर से जुड़ी मान्यताओं को तोड़ने में कबीर के साहसिक निर्णयों को रेखांकित किया।

देवास की प्रतिभाओं को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच
आरजेएस पीबीएच के संस्थापक उदय कुमार मन्ना ने जानकारी दी कि देवास के कलाकार दयाराम सारोलिया और करण सिंह पोरवाल को 12 फरवरी को दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा जाएगा। साथ ही 21 फरवरी को मालवा कबीर यात्रा के तहत वर्चुअल और फिजिकल कार्यक्रमों का आयोजन कर नशाखोरी, अंधविश्वास और सामाजिक विभाजन के खिलाफ जागरूकता फैलाने की योजना बनाई गई है।

इस पूरे आयोजन में अकादमिक विमर्श, लोक संगीत और सकारात्मक पत्रकारिता का अनूठा संगम देखने को मिला। आयोजकों का कहना है कि संत कबीर की शिक्षाएं आज भी समाज को जोड़ने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। आरजेएस की नई शाखाएं और निरंतर पहलें इसी सकारात्मक सोच को देश-विदेश तक पहुंचाने का कार्य करेंगी।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox