नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- नई दिल्ली के भारत मंडपम, प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेला 2026 के दौरान आध्यात्मिक साहित्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आयोजन संपन्न हुआ। मेले के अंतर्गत हिंदी लेखन मंच द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा प्रकाशित दो धार्मिक पुस्तकों “द लाइट ऑफ विजडम” और “हंसादेश” का विधिवत विमोचन किया गया। यह दोनों पुस्तकें आध्यात्मिक मूल्यों, मानव कल्याण और जीवन दर्शन पर केंद्रित हैं, जिन्हें पाठकों के बीच सकारात्मक संदेश पहुंचाने के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है।

हिंदी लेखन मंच पर गणमान्य संतों और विद्वानों की उपस्थिति
इस अवसर पर मानव उत्थान सेवा समिति के वरिष्ठ महात्मा श्री सत्यबोधानंद जी, महात्मा देवकली बाई जी, संस्था के मंत्री श्री आनंदी प्रसाद जी, श्रीमती मंजू कुंद्रा, कु. तौसी जी, श्री ज्ञान भाई जी, श्री नवीन सिंघल जी, श्री धर्मेंद्र तंवर जी और श्री रणवीर जी सहित अनेक विशिष्ट अतिथि मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन चेतन फुलेरा द्वारा किया गया, जिन्होंने आयोजन को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया।

13 भाषाओं में प्रकाशित हो रहा आध्यात्मिक साहित्य
अपने संबोधन में महात्मा सत्यबोधानंद जी ने बताया कि मानव उत्थान सेवा समिति समाज को आध्यात्मिक दिशा देने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा हिंदी, अंग्रेजी, नेपाली, गुजराती सहित लगभग 13 भाषाओं में आध्यात्मिक और धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित की जा रही हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विश्व पुस्तक मेले में संस्था की ओर से आध्यात्मिक पुस्तकों की एक विशेष स्टॉल लगाई गई है, जिसका उद्घाटन 10 जनवरी को आध्यात्मिक गुरु सदगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज ने फीता काटकर किया था।

समाज में सद्भावना और आध्यात्मिक चेतना का संदेश
महात्मा सत्यबोधानंद जी ने आगे कहा कि श्री सतपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में मानव उत्थान सेवा समिति देश और विदेश में संत-महात्माओं के माध्यम से सद्भावना सम्मेलनों का आयोजन कर रही है। आध्यात्मिक पुस्तकों के प्रकाशन और प्रचार से समाज को सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे व्यक्ति के जीवन में संतुलन और शांति स्थापित हो सके।

भौतिक प्रगति के साथ आध्यात्मिक विकास पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के मंत्री श्री आनंदी प्रसाद जी ने कहा कि पुस्तकें मानव जीवन में मार्गदर्शक की भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि आज के युग में भौतिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी उतनी ही आवश्यक है। इसी विचारधारा के तहत मानव उत्थान सेवा समिति निरंतर आध्यात्मिक पुस्तकों का प्रकाशन कर समाज को जीवन मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है।


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