लखनऊ सीट बनी अपर्णा यादव के परिवार से अलग जाने की वजह..!

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 11, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

लखनऊ सीट बनी अपर्णा यादव के परिवार से अलग जाने की वजह..!

-पीएम मोदी व सीएम योगी की समय-समय पर करती रही है तारीफ

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/उत्तर प्रदेश/शिव कुमार यादव/- भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव दोनों को ही आज बड़ा झटका दिया है। भाजपा और योगी आदित्यनाथ ने मुलायम सिंह यादव के घर में ही सेंध हुए उनकी छोटी बहू आपर्णा यादव को अपने पाले में शामिल कर अखिलेश यादव को करारा जवाब दिया है। हालांकि एक दिन पहले ही अखिलेश यादव ने कहा था कि यह उनके घर का मामला है और इसे सुलझा लिया गया है। लेकिन असल लड़ाई लखनऊ सीट को लेकर हुई है जिसके चलते अपर्णा यादव ने परिवार से अलग होकर भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया।
              अपर्णा यादव के समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ने और बीजेपी का दामन थामने के पीछे लखनऊ सीट को बड़ा कारण बताया जा रहा है। अपर्णा इस सीट से 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ीं थी। उन्हें 61 हजार से अधिक वोट मिले थे। उन्होंने 2022 में भी इस सीट के लिए दावेदारी पेश की थी।  सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, अपर्णा यादव को अखिलेश यादव ने लखनऊ कैंट से टिकट देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने बीजेपी जॉइन करने का फैसला किया।
                 यहां बता दे कि अपर्णा यादव मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी है। शादी से पहले अपर्णा अपने नाम के साथ बिष्ट लगाती थी। वह अरविंद सिंह बिष्ट की बेटी है और मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उनकी शादी मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र प्रतीक यादव से 2011 में हुई थी। 2017 में अपर्णा ने सपा की टिकट पर लखनऊ कैंट सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी से हार गई थी।
                 लखनऊ कैंट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से आई रीता बहुगुणा जोशी ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वह यहां से विधायक चुनी गईं। 2019 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद बीजेपी ने उपचुनाव में सुरेश तिवारी को मैदान में उतारा, जो 1996, 2002 और 2007 में जीत का परचम लहरा चुके हैं। आपको बता दें कि 2012 में रीता बहुगुणा जोशी बतौर कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव जीती थी।
              वहीं खबर आ रही है कि इस सीट से रीता बहुगुणा जोशी अपने बेटे के लिए टिकट मांगा है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी ने टिकट देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में लखनऊ कैंट सीट से अपर्णा यादव को बीजेपी द्वारा टिकट देने की संभावना बढ़ गई है। आपको बता दें कि डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के भी इसी सीट से चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि पहली लिस्ट में उनका नाम नहीं था। शर्मा फिलहाल विधान परिषद सदस्य हैं।
                 दिल्ली के भाजपा दफ्तर में पार्टी से जुड़ने के मौके पर अपर्णा यादव ने कहा कि मैं हमेशा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित थी। मेरे चिंतन में राष्ट्र सबसे पहले है। मुझे लगता है कि मेरे लिए राष्ट्र सबसे पहले है। मैं अब राष्ट्र की आराधना के लिए निकली हूं। मैं पीएम नरेंद्र मोदी की कार्यशैली से प्रभावित रही हूं। मैं यही कहूंगी कि अपनी क्षमता के मुताबिक जो भी कर सकूंगी, वह करूंगी। बता दें कि अपर्णा यादव लंबे समय से पीएम नरेंद्र मोदी, भाजपा और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ करती रही हैं।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox