अनीशा चौहान/- रायबरेली सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले पहुंचे, जहां उन्होंने रेप पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की। यह मुलाकात उस समय हुई जब रेप पीड़िता के परिजनों ने राहुल गांधी को एक पत्र लिखकर अपनी मदद की अपील की थी। इस दौरे को लेकर राजनीतिक हलकों में कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी उन मुद्दों पर ज्यादा सक्रिय हो गई है, जिनकी पिच पहले समाजवादी पार्टी ने तैयार की थी। चाहे वह हाथरस की घटना हो, संभल की घटना हो या बहराइच की घटना, समाजवादी पार्टी ने इन मुद्दों पर योगी सरकार को सड़क से संसद तक घेरने की कोशिश की थी। लेकिन जब सपा इन मुद्दों पर शांत हो गई, तो कांग्रेस ने इस पिच पर सियासत को धार देने की कोशिश की।
कांग्रेस की एकला चलो नीति
कांग्रेस का मानना है कि पार्टी को अपनी खोई हुई राजनीतिक पैठ को फिर से मजबूत करना होगा। पहले संभल जाने की कोशिश की, लेकिन न जा पाने पर पीड़ितों से दिल्ली में मुलाकात की और अब हाथरस जाकर उन्होंने परिजनों से मुलाकात की। इसके माध्यम से कांग्रेस सपा को यह संदेश दे रही है कि उसे कमजोर न आंका जाए। दूसरी ओर, कांग्रेस अपनी सांगठनिक स्थिति को भी मजबूत करने की कोशिश कर रही है ताकि आने वाले चुनावों में वह सपा के सामने अपनी दावेदारी पेश कर सके।
कांग्रेस का दावा और भविष्य की रणनीति
कांग्रेस की रणनीति यह है कि वह 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले दलित और संविधान के मुद्दों पर अपना वर्चस्व बनाए रखे। सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक पर अपनी दावेदारी ठोकने की कोशिश कर रही है। इन मुद्दों के जरिए कांग्रेस सपा के साथ मुकाबला करने की रणनीति पर काम कर रही है और अपने वोट बैंक को सशक्त बनाने के प्रयास में जुटी है।


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