रजनी भंडारी को प्रशासक न बनाने पर हाईकोर्ट ने पंचायतीराज सचिव और डीएम को जारी किया अवमानना नोटिस

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August 17, 2026

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रजनी भंडारी को प्रशासक न बनाने पर हाईकोर्ट ने पंचायतीराज सचिव और डीएम को जारी किया अवमानना नोटिस

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नैनीताल/उत्तराखंड/अनीशा चौहान/- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी को प्रशासक नियुक्त नहीं करने के मामले में दायर विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए सचिव पंचायतीराज और जिलाधिकारी चमोली को अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने 27 मार्च को दिए गए आदेश का अनुपालन न करने को अदालत की अवमानना माना है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में हुई।

27 मार्च के आदेश की अवहेलना पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

न्यायालय ने 27 मार्च को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि रजनी भंडारी को तत्काल प्रशासक का चार्ज सौंपा जाए और इसकी रिपोर्ट 1 अप्रैल तक न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। लेकिन सरकार ने न तो रिपोर्ट पेश की और न ही उन्हें प्रशासक का चार्ज दिया। इसपर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पंचायतीराज सचिव और जिलाधिकारी चमोली के खिलाफ न्यायालय के आदेशों की अवमानना का नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया है।

रजनी भंडारी को प्रशासक बनाने में भेदभाव का आरोप

विशेष अपील में कहा गया कि जिला पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सभी निवर्तमान अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त किया गया, लेकिन रजनी भंडारी को प्रशासक नहीं बनाया गया। जब उन्होंने इसपर आपत्ति जताई, तो सरकार ने कहा कि उनका मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए उन्हें प्रशासक नहीं बनाया जा सकता।

पूर्व में बहाली का आदेश जारी कर चुका है न्यायालय

सुनवाई के दौरान भंडारी के अधिवक्ता ने दलील दी कि न्यायालय के आदेश के बाद रजनी भंडारी को बहाल कर दिया गया था और यह आदेश अभी भी प्रभावी है। इसपर न्यायालय ने निर्देश दिया कि उन्हें शीघ्र प्रशासक का चार्ज दिया जाए और इसकी रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाए।

पद से हटाने का विवाद और आरोप

पूर्व में भंडारी को पद से हटाए जाने के फैसले के खिलाफ उन्होंने न्यायालय में याचिका दायर की थी। दरअसल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख नंदन सिंह बिष्ट की शिकायत पर पंचायतीराज विभाग ने आदेश जारी कर भंडारी को जिला पंचायत अध्यक्ष पद से हटा दिया था।

उन पर आरोप था कि 2012-13 में नंदा राज जात यात्रा मार्ग पर विकास कार्यों की निविदाओं में गड़बड़ी की गई। साथ ही, यह भी कहा गया कि उन्होंने अपने दायित्व का उचित निर्वहन नहीं किया। याचिका में भंडारी ने दावा किया कि सिर्फ एक व्यक्ति की शिकायत पर उन्हें पद से हटा दिया गया और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। इस आदेश को उन्होंने खंडपीठ में चुनौती दी थी।

अदालत ने पहले ही बहाली का आदेश दिया था

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास बहुगुणा ने बताया कि न्यायालय ने पहले ही भंडारी की बहाली का आदेश दिया था। अब, अदालत के आदेश का पालन न करने पर दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

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