मूडीज ने भारत को बताया जी-20 देशों में सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था

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मूडीज ने भारत को बताया जी-20 देशों में सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था

-फाइनेंसियल ईयर 25 में 6.5 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रहने का अनुमान जताया -ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने एफवाई 24 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8 फीसदी के आसपास रखी

कारोबार/शिव कुमार यादव/- मूडीज रेटिंग्स ने मजबूत आर्थिक वृद्धि और चुनाव के बाद नीतिगत निरंतरता रहने की उम्मीद पर भारत की ग्रोथ रेट 2024 में 6.8 फीसदी और 2025 में 6.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। मूडीज ने भारत को जी-20 देशों में सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था बताया है। बता दें कि भारत की वास्तविक जीडीपी वर्ष 2023 में 7.7 फीसदी बढ़ी थी, जबकि 2022 में 6.5 फीसदी की ग्रोथ रेट थी। सरकार के सशक्त पूंजीगत व्यय और मजबूत विनिर्माण गतिविधियों के दम पर यह संभव हो पाया।

मूडीज ने ‘वैश्विक व्यापक-आर्थिक परिदृश्य 2024-25’ में कहा, हमारा मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को आसानी से 6-7 फीसदी की दर से बढ़ना चाहिए. हम इस साल करीब 6.8 फीसदी ग्रोथ का अनुमान लगाते हैं। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद नीति निरंतरता होने के साथ मजबूत, व्यापक-आधारित ग्रोथ को बनाए रखा जा सकेगा।
          मूडीज ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में 11.1 लाख करोड़ रुपये यानी जीडीपी का 3.4 फीसदी पूंजीगत व्यय आवंटन का लक्ष्य रखा गया है, जो 2023-24 के अनुमान से 16.9 फीसदी अधिक है। एजेंसी ने कहा, हम आम चुनाव के बाद नीतिगत निरंतरता और इंफ्रास्ट्रक्चर के ग्रोथ पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद करते हैं।
         मूडीज रेटिंग्स ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण तथा लक्षित विनिर्माण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के साथ निजी औद्योगिक पूंजीगत व्यय में भी तेजी आने की संभावना है।

दरों में कटौती की उम्मीद अभी कम
भारतीय रिजर्व बैंक (त्ठप्) ने अप्रैल में रेपो दर को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखा, जो फरवरी 2023 से अपरिवर्तित है। मूडीज रेटिंग्स ने कहा, ठोस वृद्धि गतिशीलता और मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर देखते हुए, हम निकट भविष्य में नीतिगत दर में नरमी की उम्मीद नहीं करते हैं।

2025 में महंगाई दर
इस रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य मूल्य के छिटपुट दबाव महंगाई परिदृश्य में अस्थिरता बनाए रखते हैं, लेकिन अप्रैल में कुल और मुख्य मुद्रास्फीति क्रमशः 4.8 फीसदी और 3.2 फीसदी तक कम हुई। यह 2022 में क्रमशः 7.8 फीसदी और 7.1 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।

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