मासूम मौत का जिम्मेदार: कोल्डड्रिफ्ट सिरप की चेतावनी हुई नजरअंदाज

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मासूम मौत का जिम्मेदार: कोल्डड्रिफ्ट सिरप की चेतावनी हुई नजरअंदाज

मानसी शर्मा/-   मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ से 14 से ज्यादा मासूम बच्चों की मौत हो चुकी हैं, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। लैब जांच में सिरप में 48.6% तक डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक घातक रसायन पाया गया, जो किडनी फेलियर और मौत का कारण बनता है। चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दो साल पहले यानी 2023 में इस सिरप पर स्पष्ट चेतावनी जारी की थी, जिसमें 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ‘वार्निंग’ लगाने का निर्देश था। लेकिन चेन्नई की श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स ने इसे अनदेखा कर दिया।

दो साल पहले दी थी चेतावनी

CDSCO की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी (SEC) ने 18 दिसंबर 2023 को एक स्पष्ट आदेश जारी किया था। इसमें क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट (2mg) और फिनाइलफ्राइन HCL (5mg) युक्त फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन (FDC) पर रोक लगाई गई। निर्देश के अनुसार, ये दवा 4 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जा सकती, क्योंकि इसके नुकसान फायदे से ज्यादा हैं। पैकेजिंग पर ‘4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए निषिद्ध’ जैसी चेतावनी अनिवार्य थी।

लेकिन श्रीसन फार्मा ने इसकी धज्जियां उड़ा दीं। कंपनी का कोल्ड्रिफ सिरप आज भी बिना किसी उम्र-सीमा चेतावनी के बाजार में बिक रहा था। तमिलनाडु ड्रग डिपार्टमेंट की जांच में कंपनी की कांचीपुरम फैक्ट्री पर कई खामियां मिलीं- जीएमपी (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) प्रमाणपत्र न होना, सालाना निरीक्षण न होना और 14 साल पुरानी अनियमितताएं। कंपनी 1990 में शुरू हुई थी, लेकिन अधिकारियों की आंखें मूंदी रहीं। अब CDSCO ने तमिलनाडु FDA को सबसे सख्त कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।

डॉक्टर की गिरफ्तारी से सस्पेंशन

जानकारी के अनुसार, इस मामले में मुख्य आरोपी डॉक्टर प्रवीन सोनी हैं, जिन्होंने बच्चों को सिरप लिखा। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, जबकि मुख्यमंत्री के निर्देश पर उन्हें तुरंत सस्पेंड भी कर दिया गया। सोनी की पत्नी के मेडिकल स्टोर ‘अपना मेडिकल स्टोर्स’ का लाइसेंस रद्द हो गया। इंदौर कलेक्टर ने तो साफ कह दिया कि प्रतिबंधित सिरप लिखने पर डॉक्टर जेल जाएंगे। साथ ही, छिंदवाड़ा और जबलपुर के ड्रग इंस्पेक्टरों को सस्पेंड किया गया। वहीं, एक मेडिकल स्टोर मालिक ने खुलासा किया कि डॉक्टरों को दवाओं पर 20% से 90% तक कमीशन मिलता है, जो इस तरह की लापरवाही को बढ़ावा देता है। स्वास्थ्य विभाग ने 19 दवा कंपनियों की विशेष जांच का फैसला लिया है।

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