महिला की ना का मतलब ना ही होता है फिर चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित

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August 25, 2026

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महिला की ना का मतलब ना ही होता है फिर चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित

-हाईकोर्ट ने मैरिटल रेप केस में कहा इसे अलग मुकाम पर नही ला सकते, यह अपराध है

Delhi High court

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/- दिल्ली हाई कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप) के मुद्दे पर मंगलवार को कहा कि अगर औरत ना कहती है, तो उसका मतलब ना ही होता है। फिर चाहे वह महिला विवाहित हो या फिर अविवाहित, यह अपराध है। ऐसे रिश्ते अलग मुकाम पर नहीं जा सकते हैं। कोर्ट ने सवाल किया कि एक अविवाहित महिला के रूप में एक विवाहित महिला की गरिमा कैसे प्रभावित नहीं होती है जब पुरुष खुद को उस पर थोपता है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे में रिश्ते एक अलग मुकाम पर नहीं जा सकते हैं क्योंकि एक महिला एक महिला रहती है। कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब मंगलवार को जस्टिस राजीव शकधर और सी हरिशंकर की खंडपीठ वैवाहिक बलात्कार के अपराधीकरण से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस राजीव शकधर ने दिल्ली सरकार की वकील नंदिता राव से पूछा कि यह एक अविवाहित महिला की गरिमा को प्रभावित क्यों करती है जबकि एक विवाहित महिला की गरिमा को प्रभावित नहीं करती है। जस्टिस शकधर का यह सवाल तब आया जब दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को सूचित किया कि विवाहित महिलाएं आईपीसी की धारा 498 ए के तहत इलाज की मांग कर सकती है। दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को यह भी बताया कि आज की स्थिति में पति-पत्नी द्वारा आईपीसी की धारा 377, 498ए और 326 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाती है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि विवाहित महिला के साथ भेदभाव क्यों ? क्या विवाहित महिला की गरिमा भंग नहीं होती है और अविवाहित महिला की गरिमा को ठेस पहुंचती है। कोर्ट ने कहा कि महिला चाहे शादीशुदा हो या गैरशादीशुदा उसे नहीं कहने का हक है। हाई कोर्ट ने दुनिया के दूसरे देशों का भी उदाहरण दिया. कोर्ट ने कहा कि दुनिया के जिन 50 देशों ने वैवाहिक रेप को अपराध करार दिया है, क्या उन देशों ने गलत किया है ? कोर्ट ने कहा कि यह दलील स्वीकार करना मुश्किल है कि महिलाओं के पास दूसरे कानूनी विकल्प मौजूद हैं। कोर्ट ने कहा कि प्च्ब् की धारा 375 के अपवाद में वैवाहिक रेप को अपराध करार देने में बाधा लगाई गई है इसलिए इसे अपराध करार देने का परीक्षण संविधान की धारा 14 और 21 के तहत ही किया जा सकता है। बता दें कि आईपीसी की धारा 375 के अपवाद में कहा गया है कि पत्नी के साथ बनाया गया यौन संबंध अपराध नहीं है। है। इसके साथ-साथ अदालत ने यह कहते हुए उदाहरण भी रखा कि कल्पना कीजिए कि एक महिला को मासिक धर्म हो रहा है, पति कहता है कि वह सेक्स करना चाहता और उसके साथ क्रूरता करता है। इसके जवाब में दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि यह एक अपराध है लेकिन आईपीसी की धारा 375 के तहत नहीं।

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