नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- इकोनॉमिक सर्वे 2024 देश के सामने आ चुका है, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण में सोमवार को दिन पेश किया है। इस आर्थिक सर्वे में सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान देश की वास्तविक जीडीपी या वृद्धि दर 6.5-7% रहने का अनुमान जताया है। दूसरी तरफ सर्वे में महंगाई को लेकर बड़ी चिंता व्यक्त की गई है। सर्वे में कहा गया है कि खाद्य महंगाई लगातार ऊंची बनी हुई है। टमाटर और प्याज की कीमतें काफी है। इसके अलावा दालों की कीमतें भी काफी ज्यादा है। ऐसे में इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि देश में बढ़ती महंगाई का प्रमुख कारण क्लाइमेट यानी जलवायु में बदलाव है। जहां एक तरफ भीषण गर्मी की वजह से फसलों का नुकसान हो रहा है। उसके बाद भारी बारिश के कारण भी फसल और सप्लाई चेन दोनों प्रभावित हो रही है।
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, महंगाई में लगातार बढ़ने की प्रमुख वजह खाद्य कीमतों में इजाफा है। वहीं 2022 की बात करें तो उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक यानी की सीएफपीआई पर बेस्ट फूड इन्फ्लेशन 3.8 फीसदी देखने को मिली थी। जोकि साल 2023 में 6.6 फीसदी पर आ गई। वित्त वर्ष 2024 में खाद्य महंगाई 7.5 फीसदी देखने को मिली है। अगर बात जून महीने की करें तो सरकारी आंकड़ों के अनुसार फूड इन्फ्लेशन 9.55 फीसदी था, जबकि मई 2024 में ये आंकड़ा 8.69 फीसदी देखने को मिला था।
क्यों बढ़ रही है महंगाई
गौरतलब है कि फसल के अनुकूल मौसम नहीं होने की वजह से सब्जियों और दालों की उत्पादन को भी प्रभावित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति 3.8 प्रति से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2012 में प्रतिशत से वित्त वर्ष 2013 में 6.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2014 में 7.5 प्रतिशत तक बढ़ी थी।


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