मन की बात: पीएम मोदी ने दिया आत्मनिर्भरता और स्वदेशी का संदेश

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August 18, 2026

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मन की बात: पीएम मोदी ने दिया आत्मनिर्भरता और स्वदेशी का संदेश

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के 125वें संस्करण में देशवासियों से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर बढ़ते आर्थिक तनाव और टैरिफ वॉर का सीधा ज़िक्र किए बिना स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में देश को मजबूती देने का सबसे बड़ा मंत्र है – वोकल फॉर लोकल। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक जब स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देंगे, तभी आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा।

त्योहारों में अपनाएँ स्वदेशी संस्कृति

पीएम मोदी ने कहा कि देश में इस समय गणेश उत्सव का उल्लास दिखाई दे रहा है और आने वाले समय में कई और पर्व-त्योहार मनाए जाएंगे। उन्होंने अपील की कि इन त्योहारों की रौनक में लोग विदेशी सामान को भूलकर केवल देश में बने उत्पादों का इस्तेमाल करें। चाहे उपहार हों, परिधान हों, घर की सजावट हो या रोशनी की झालरें – हर चीज़ स्वदेशी होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया, “गर्व से कहो – ये स्वदेशी है।”

आत्मनिर्भर भारत ही सही रास्ता

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक ही मंत्र है – वोकल फॉर लोकल, एक ही रास्ता है – आत्मनिर्भर भारत और एक ही लक्ष्य है – विकसित भारत। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाने से न केवल छोटे कारोबारियों को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।

प्राकृतिक आपदाओं पर चिंता व्यक्त

अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने देश के कई हिस्सों में लगातार बारिश के चलते आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं देशवासियों की परीक्षा ले रही हैं, लेकिन इन चुनौतियों से मिलकर निपटना होगा। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति शोक संवेदना भी प्रकट की।

स्वच्छता का संदेश भी दिया

त्योहारों के बीच प्रधानमंत्री ने लोगों को स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जहां सफाई होती है, वहीं त्योहारों की खुशियां दोगुनी हो जाती हैं। स्वच्छता अभियान को उन्होंने न केवल स्वास्थ्य से जोड़ा, बल्कि सामाजिक अनुशासन और जिम्मेदारी से भी जोड़कर देखने की बात कही।

संवाद बनाए रखने की अपील

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे लगातार “मन की बात” कार्यक्रम के लिए अपने सुझाव और संदेश भेजते रहें। उन्होंने कहा कि हर विचार और फीडबैक इस कार्यक्रम की आत्मा है और इससे देश के साथ संवाद का एक मजबूत सेतु तैयार होता है।

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