भारत के खिलाफ ’तीसरा फ्रंट’ खोलने की तैयारी में तुर्किये!

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

September 2026
MTWTFSS
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930 
September 23, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

भारत के खिलाफ ’तीसरा फ्रंट’ खोलने की तैयारी में तुर्किये!

-’स्पेस पोर्ट’ प्लान से तुर्की भारत पर रखना चाहता है नजर -सोमालिया के साथ स्पेसपोर्ट डील कर सकता है तुर्की

अंकारा/इस्लामाबाद/शिव कुमार यादव/- भारत के साथ पाकिस्तान के संघर्ष के दौरान तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। हालांकि इसमें तुर्की ज्यादा कुछ नही कर सका लेकिन अब तुर्की ने ऐसा रास्ता चुना है जिसके जरिये वह भारत को परेशान का सकता है। दरअसल तुर्की भारत के खिलाफ तीसरा फ्रंट खोलने की तैयारी कर रहा है। तुर्की की नजरे चीन की तरह ही हिंद महासागर में टिकी हुई हैं और इसके लिए वो अंतरिक्ष में बैलिस्टिक मिसाइल की टेस्ट के लिए एक स्पेसपोर्ट बनाने के लिए जगह खोज रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि तुर्की कथित तौर पर ’हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ के सोमालिया से स्पेसपोर्ट बनाने के लिए बात कर रहा है। इसके जरिए तुर्की की कोशिश ना सिर्फ ’हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ में अपना प्रभाव बढ़ाना है, बल्कि स्पेस टेक्नोलॉजी को विस्तार देते हुए सोमालिया में बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च पैड बनाना है। तुर्की इसके जरिए सोमालिया में स्थिति रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाना चाहता है।

हालांकि तुर्की का ये प्रोजेक्ट सीधे तौर पर भारत को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन पाकिस्तान की मदद के लिए जिस तरह से तुर्की खड़ा रहा है, वो भविष्य में नये खतरे का दरवाजा खोलता है। तमेवदंदजदमू.बवउ की रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में पाकिस्तान तुर्की के साथ स्पेस बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में शामिल हो सकता है और यहां से भारत के लिए सीधी परेशानी शुरू होगी। तुर्की अपने इस प्रोजेक्ट के जरिए हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। तुर्की ने पिछले कुछ सालों में काफी तेजी से अपने ड्रोन और दूसरे हथियार भारत के पड़ोसी देशों के साथ साथ अफ्रीका के कई देशों को बेचे हैं। ऐसे में सोमाली में स्पेसपोर्ट बनाने के बाद तुर्की अपने डिफेंस प्रोग्राम को काफी तेजी से बढ़ा सकता है।स्पेसपोर्ट आखिर क्यों बनाना चाहता है तुर्की?दरअसल तुर्की कई भौगोलिक परेशानियों से बंधा हुआ है। उसके लिए भूमध्य सागर और काला सागर के पास टेस्ट लॉन्च करना काफी जोखिम भरा साबित हो सकता है। तुर्की के लिए अपनी सीमा के अंदर से मिसाइलों का टेस्ट करना और लगातार भीतरी और बाहरी निगरानी करना भी काफी मुश्किल काम है। लिहाजा तुर्की को एक ऐसे जगह की तलाश है, जो उसके लिए भौगोलिक तौर पर आदर्श स्थिति बनाता हो और रणनीतिक तौर पर उसके लिए फायदेमंद हो। एर्दोगन की इस कसौटी पर सोमालिया सटीक खड़ा उतरता है। मुख्य भूमि अफ्रीका के पूर्वी सिरे पर स्थित सोमालिया, हिंद महासागर के साथ सोमालिया की तटरेखा और भूमध्य रेखा से इसकी नजदीकी, इसे स्पेस पोर्ट बनाने के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है। यहां से भूमध्यरेखीय प्रक्षेपण स्थलों को पृथ्वी की घूर्णन स्पीड का लाभ मिलता है, जो रॉकेट प्रक्षेपणों के लिए एक प्राकृतिक फायदा है। यहां से लॉन्च करने पर मिसाइलों को कम ईंधन की जरूरत होती है और एक सुरक्षित स्थान बनाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की सोमालिया के जमामे ड्यून क्षेत्र में स्पेसपोर्ट बनाना चाहता है। तुर्की साल 2028 तक सॉफ्ट मूल लैंडिंग करवाने की योजना पर काम करना चाहता है और इसके लिए उसने एक अरब डॉलर का प्रोजेक्ट बना रखा है। राष्ट्रपति एर्दोगन ने साल 2021 में इसकी घोषणा की थी। माना जा रहा है कि स्पेसपोर्ट तो बनाने से लेकर इसके मेंटिनेंस में करीब 350 मिलियन डॉलर खर्च हो सकते हैं। इस पोर्ट से तुर्की को हिंद महासागर तक सीधी पहुंच मिलती है, जिससे मिसाइल और रॉकेट परीक्षण निर्जन जल क्षेत्रों की ओर मोड़े जा सकते हैं। वहीं तुर्की से अगर मिसाइलों की लॉन्चिंग होती है तो उसे आसानी से पश्चिमी देश ट्रैक कर सकते है और हस्तक्षेप कर सकते हैं, लेकिन सोमालिया में ये खतरा खत्म हो जाता है।तुर्की का स्पेसपोर्ट प्रोजेक्ट भारत के लिए कितनी चिंता की बात?सोमालिया जिस जगह स्थिति है, वो भारत के अंडमान-निकोबार कमांड, मालदीव और भारतीय नौसेना की अफ्रीकन स्ट्रैटजी के लिए संवेदनशील है। लिहाजा तुर्की का वहां स्थायी स्पेस बेस होना, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के प्रभुत्व को सीधी चुनौती हो सकता है। तुर्की अब भारत के खिलाफ संघर्ष में पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा, ये साबित हो चुका है, लिहाजा इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भविष्य में पाकिस्तान तुर्की के सोमालिया पोर्ट का फायदा नहीं उठा सकता है। चीन पहले से जिबूती में सैन्य बेस बना चुका है और अब अगर तुर्की भी आ गया, तो चीन-पाक-तुर्क त्रिकोण इंडियन ओसियन क्षेत्र में भारत के लिए ’खतरनाक गठबंधन’ बना सकता है। इससे भारत के खिलाफ ’थ्री फ्रंट खतरे’ की शुरूआत हो सकती है। पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में चीन और दक्षिण-पश्चिम में सोमालिया के स्पेसपोर्ट से तुर्की।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox