भारतीय समय गणना की वैज्ञानिकता पर मंथन

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June 20, 2026

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-नई दिल्ली में आरजेएस का विशेष आयोजन -नवसंवत्सर 2083 पर सकारात्मक मीडिया संवाद

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-  नई दिल्ली में नवसंवत्सर और विक्रम संवत 2083 के अवसर पर राइजिंग जर्नलिस्ट सोसाइटी द्वारा एक विशेष सकारात्मक मीडिया संवाद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर के विद्वानों, विचारकों और समाजसेवियों ने भाग लेकर भारतीय नववर्ष की वैज्ञानिकता, सांस्कृतिक गहराई और वैश्विक महत्व पर विस्तृत चर्चा की।

भारतीय पंचांग को बताया वैज्ञानिक प्रणाली
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भारतीय पंचांग को एक सटीक और वैज्ञानिक समय गणना प्रणाली बताया। विशेषज्ञों का कहना था कि यह प्रणाली नक्षत्रों और खगोलीय घटनाओं पर आधारित है, जिससे प्रकृति और ब्रह्मांड के साथ मानव जीवन का गहरा संबंध स्थापित होता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राचीन भारतीय गणना पद्धति इतनी सटीक है कि बिना आधुनिक तकनीक के भी ग्रहण जैसी घटनाओं की सटीक भविष्यवाणी संभव है।

उज्जैन को बताया समय गणना का केंद्र
मुख्य अतिथि प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा ने उज्जैन को भारत की समय गणना का केंद्र बताते हुए इसकी ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय नववर्ष विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों—जैसे गुड़ी पड़वा, उगादी, नवरेह और चेटीचंड—से मनाया जाता है, लेकिन इसका मूल आधार एक ही है, जो सृष्टि के आरंभ का प्रतीक है।

धार्मिक परंपराओं में छिपा वैज्ञानिक दृष्टिकोण
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि नवरात्रि और रमजान जैसे पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और शारीरिक संतुलन से भी जुड़े हैं। मौसम परिवर्तन के दौरान उपवास रखने की परंपरा को शरीर की शुद्धि और संतुलन के लिए वैज्ञानिक रूप से लाभकारी बताया गया।

आगामी कार्यक्रमों की भी हुई घोषणा
कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक उदय कुमार मन्ना ने आने वाले आयोजनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 22 मार्च को बिहार दिवस और शहीद दिवस, 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस, 29 मार्च को सकारात्मक संवाद कार्यक्रम और 31 मार्च को महावीर जयंती के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जाएगा।

वैश्विक स्तर पर विस्तार की योजना
संस्था ने अपने सकारात्मक मीडिया अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की भी घोषणा की। इंग्लैंड से समन्वित वेबिनार के जरिए वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति, विचारधारा और “जियो और जीने दो” के संदेश को फैलाने की योजना बनाई गई है।

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