मानसी शर्मा/- एक हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार (BSE और NSE) में भारी उथल-पुथल रही। केवल पांच कारोबारी दिनों में बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मौद्रिक मूल्य लगभग 16 लाख करोड़ रुपये घट गया। शुक्रवार को सेंसेक्स 733.22 अंक टूटकर 80,426.46 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 236.15 अंक गिरकर 24,654.70 पर आ गया। पूरे सप्ताह सेंसेक्स 2.54% और निफ्टी 2.50% तक लुढ़क चुका है।
आईटी से फार्मा तक निवेशकों की बेचैनी
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे घरेलू और वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं। अमेरिका द्वारा H-1B वीजा फीस बढ़ाने से भारतीय IT कंपनियों के शेयर दबाव में आए। TCS का शेयर ₹2,900 से नीचे चला गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 88 के स्तर पर पहुँच गया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर/बैरल के पार चली गईं।
विदेशी निवेशकों ने 16,057.38 करोड़ रुपये, जबकि घरेलू निवेशकों ने 11,464.79 करोड़ रुपये का निवेश बाजार से बाहर निकाला।
टैरिफ और ब्याज दरों ने बढ़ाई अनिश्चितता
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फार्मा, फर्नीचर और भारी ट्रकों पर क्रमशः 100%, 50% और 25% का टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे भारतीय कंपनियों के शेयर प्रभावित हुए। साथ ही, फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल ने ब्याज दर में फिलहाल कोई कटौती न करने का संकेत दिया, जिससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई।
सोमवार को बाजार का मूड क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कोई मजबूत घरेलू या वैश्विक सहारा नहीं मिलता, तब तक बाजार दबाव में रह सकता है। सोने की कीमतों में तेजी, एशियाई बाजारों की कमजोरी और अमेरिका से व्यापारिक संबंधों में अस्पष्टता के कारण सोमवार को भी उतार-चढ़ाव भरा दिन रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।


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