भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल समापन

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October 18, 2026

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नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-  भारतीय शिक्षा व्यवस्था में परंपरागत ज्ञान को आधुनिक पाठ्यक्रम से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छह दिवसीय आवासीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन किया गया। यह प्रशिक्षण “पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली के समावेशन” विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से संबंधित संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में किया गया और इसका समापन एक गरिमामय समारोह में हुआ।

शिक्षकों को मिला भारतीय ज्ञान प्रणाली का गहन प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई, उसके ऐतिहासिक महत्व और आधुनिक शिक्षा में उसके उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार प्राचीन भारतीय ज्ञान को वर्तमान पाठ्यक्रम में समाहित कर शिक्षा को अधिक समृद्ध और उपयोगी बनाया जा सकता है। प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस कार्यशाला से उन्हें नई दिशा और दृष्टिकोण मिला है, जिसे वे अपने शिक्षण कार्य में लागू करेंगे।

विशेष अतिथियों ने रखे महत्वपूर्ण विचार
समापन समारोह में उपस्थित विद्वानों और अतिथियों ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा में विज्ञान, दर्शन और शिक्षा का विशाल भंडार मौजूद है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा में शामिल करना समय की मांग है।

नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव की जरूरत
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि बदलते समय के साथ शिक्षा प्रणाली में भारतीय मूल्यों और परंपराओं को शामिल करना आवश्यक है। वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा देने से विद्यार्थियों को विषयों की बेहतर समझ मिलती है और इससे ज्ञान अधिक प्रभावी बनता है। शिक्षकों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।

देशभर से आए प्रतिभागियों की रही सक्रिय भागीदारी
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 65 शिक्षकों और शोधार्थियों ने भाग लिया, जिन्होंने विभिन्न सत्रों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान संवाद, चर्चा और अनुभव साझा करने के माध्यम से प्रतिभागियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और उसे आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

राष्ट्रगान के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और शांति पाठ के साथ किया गया। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया। इस आयोजन को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में भारतीय शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने में सहायक साबित होगा।

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