भगवान राम केवल लकड़ी या पत्थर की मूरत नहीं, इस देश की पहचान हैं- राजनाथ सिंह

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June 7, 2026

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भगवान राम केवल लकड़ी या पत्थर की मूरत नहीं, इस देश की पहचान हैं- राजनाथ सिंह

-रक्षामंत्री ने कहा, ’हम अस्पताल, स्कूल और उद्योग बनाएंगे और हम मंदिर भी बनाएंगे

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- राम नवमी के मौके पर केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भगवान राम केवल लकड़ी या पत्थर की मूरत नहीं हैं, बल्कि भारत की पहचान हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार अस्पतालों, स्कूलों का निर्माण करेगी, उद्योग स्थापित करेगी और मंदिर भी बनाएगी। रक्षामंत्री रामनवमी के अवसर पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
                 इस दौरान उन्होंने कहा, ’जब राम मंदिर के निर्माण की बात आई, तो बहुत से लोगों ने इस पर अपने विचार देने शुरू कर दिए थे। कुछ लोगों ने सुझाव दिया था कि रामलला के जन्मस्थान पर एक अस्पताल बनाया जाए, जबकि अन्य ने कहा कि एक स्कूल बनाया जा सकता है। कुछ ने यह भी सुझाव दिया कि उस स्थान पर उद्योग लगाए जा सकते हैं। ये वे लोग हैं जो भगवान राम को नहीं समझते हैं।’
                 उन्होंने कहा आगे कहा, ’भगवान राम केवल पत्थर, लकड़ी या मिट्टी की मूरत नहीं हैं, वे हमारी संस्कृति और आस्था के केंद्र हैं। भगवान राम हमारी और हमारे देश की पहचान हैं।’ रक्षामंत्री ने कहा, ’हम अस्पताल, स्कूल और उद्योग बनाएंगे और हम मंदिर भी बनाएंगे।’ अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों के कारण पूर्वोत्तर के लोग दिल्ली के और अधिक करीब आ गए हैं। उन्होंने कहा कि आज पूर्वोत्तर में ’’अभूतपूर्व शांति’’है, जिसके कारण क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से अफस्पा हटा दिया गया है।
                 श्री सिंह ने कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ“ केवल एक नारा नहीं है, बल्कि एक जन आंदोलन बन गया है। रक्षा मंत्री के रूप में मैं कह सकता हूं कि आज महिलाएं सशस्त्र बलों का हिस्सा बनकर इसे और मजबूत कर रही हैं। वे फाइटर पायलट के रूप में फाइटर जेट उड़ा रही हैं। हाल ही में मैंने आर्टिलरी में महिलाओं को शामिल करने की मंजूरी दी थी।
                 उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी से हम महिला सशक्तिकरण और सशस्त्र बलों को मजबूत करने की दिशा में एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। रक्षामंत्री ने यह भी कहा कि आज के नए भारत में अभिजात्य मानसिकता के लिए कोई जगह नहीं है।

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