बीते 13 महीने में अप्रैल में थोक मूल्य मुद्रास्फीति दर रही सबसे कम

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बीते 13 महीने में अप्रैल में थोक मूल्य मुद्रास्फीति दर रही सबसे कम

-अप्रैल में थोक मूल्य मुद्रास्फीति घटकर हुई 0.85 फीसदी, मार्च में थी 2.05 फीसदी

मुंबई/शिव कुमार यादव/- विपक्ष द्वारा मंहगाई के आरोपों  के बीच थोक मूल्य मुद्रास्फीति को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है। अप्रैल में थोक मूल्य मुद्रास्फीति घटकर 0.85 प्रतिशत पर आ गई, जो मार्च में 2.05 प्रतिशत थी। यह पिछले 13 महीने में थो मूल्य मुद्रास्फीति की दर सबसे कम रही है।

बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य पदार्थों, बनाए गए उत्पादों और ईंधन की कीमतों में कमी आने से अप्रैल में थोक मूल्य मुद्रास्फीति घटकर 0.85 फीसदी रह गई। मार्च में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 2.05 फीसदी थी। पिछले साल अप्रैल में यह 1.19 फीसदी थी।

आरबीआई मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। इससे पहले मंगलवार को सरकार ने पिछले महीने की खुदरा महंगाई दर के आंकड़े जारी किए थे। इसके अनुसार अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर घटकर लगभग 6 वर्षों के निचले स्तर 3.16 प्रतिशत पर आ गई।

उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अप्रैल में मुद्रास्फीति की सकारात्मक दर मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों, रसायन और रासायनिक उत्पादों, परिवहन उपकरणों और मशीनरी के विनिर्माण आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों में अप्रैल में 0.86 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि मार्च में मुद्रास्फीति 1.57 प्रतिशत थी। सब्जियों की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई।

अप्रैल में सब्जियों की कीमतों में 18.26 फीसदी की गिरावट
अप्रैल में सब्जियों की कीमतों में 18.26 फीसदी की गिरावट रही, जबकि मार्च में यह गिरावट 15.88 फीसदी थी। प्याज में अप्रैल में मुद्रास्फीति घटकर 0.20 प्रतिशत रह गई, जबकि मार्च में यह 26.65 फीसदी थी। हालांकि, अप्रैल में विनिर्मित उत्पादों में मुद्रास्फीति 2.62 प्रतिशत रही, जबकि मार्च में यह 3.07 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली में भी अप्रैल में 2.18 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि मार्च में यह 0.20 प्रतिशत थी।

खुदरा महंगाई दर घटकर 6 वर्षों के निचले स्तर पर
इससे पहले मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति 3.16 प्रतिशत रही, जो जुलाई, 2019 के बाद का सबसे निचला स्तर है। जुलाई, 2019 में यह 3.15 प्रतिशत थी। अप्रैल में खाद्य महंगाई दर घटकर 1.78 प्रतिशत रही, जो मार्च में 2.69 प्रतिशत और पिछले साल अप्रैल में 8.7 प्रतिशत थी। यह गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों, फलों, दालों और अन्य प्रोटीन युक्त वस्तुओं की कीमतों में नरमी के कारण दर्ज की गई।

संतोषजनक दायरे में बनी हुई है खुदरा मुद्रास्फीति
अब तक खुदरा मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संतोषजनक दायरे में बनी हुई है। आरबीआई को सरकार ने मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने का दायित्व सौंपा है। पिछले महीने खाद्य मुद्रास्फीति 1.78 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले इसी महीने में 8.7 प्रतिशत थी। मार्च में खाद्य मुद्रास्फीति 2.69 प्रतिशत रही थी।

2025-26 के लिए सीपीआई महंगाई दर का अनुमान चार प्रतिशत
भारतीय रिजर्व बैंक को महंगाई को 4 प्रतिशत (2 प्रतिशत) के दायरे में बनाए रखने का लक्ष्य दिया गया है। मूल्य स्थिति में सुधार आने के बाद आरबीआई दो किस्तों में प्रमुख ब्याज दर में 0.50 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सीपीआई महंगाई दर का अनुमान 4 प्रतिशत रखा है।

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