पटना/उमा सक्सेना/- पटना का गांधी मैदान इस समय एक ऐतिहासिक राजनीतिक क्षण का साक्षी बनने को तैयार है। पूरा परिसर सज चुका है, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और मीडिया की निगाहें उसी मंच पर टिकी हैं, जहाँ कुछ ही देर में बिहार की राजनीति का नया अध्याय शुरू होगा। गुरुवार को नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं—यह केवल एक शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता में उनकी लंबी और निरंतर भूमिका का प्रतीक है।
एनडीए ने सर्वसम्मति से चुना नेता
बुधवार को एनडीए विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। इसके बाद उन्होंने राजभवन जाकर इस्तीफा सौंपा और नई सरकार बनाने का दावा पेश किया। उनके साथ चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा, धर्मेंद्र प्रधान, ललन सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिससे साफ संकेत मिला कि इस बार एनडीए पहले से कहीं ज्यादा एकजुट है।
कौन होंगे नए उपमुख्यमंत्री?
नई सरकार की रूपरेखा भी लगभग तैयार है। भाजपा ने अपने विधायक दल का नेता सम्राट चौधरी और उपनेता विजय कुमार सिन्हा को चुना है। दोनों नेताओं के आज उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की पूरी संभावना है। भाजपा पुराने मंत्रियों को ही पुनः मौका देने के मूड में है, जबकि नए चेहरों की एंट्री चिराग पासवान की लोजपा(आर), उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो और जीतन राम मांझी की हम से तय मानी जा रही है। यह नई सरकार में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को और मजबूत करता है।
बिहार की राजनीति का नया अध्याय
नीतीश कुमार की 10वीं पारी इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने पिछले कई दशकों में बिहार की राजनीति में अपना अलग स्थान बनाया है। आज का शपथ ग्रहण समारोह न केवल सत्ता परिवर्तन का क्षण है, बल्कि राज्य में स्थिर नेतृत्व और राजनीतिक साझेदारी की नई शुरुआत भी माना जा रहा है।


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