पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर का निधनः 100 साल की उम्र में ली आखिरी सांस,

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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर का निधनः 100 साल की उम्र में ली आखिरी सांस,

-कैंसर से पीड़ित थे जिमी कार्टर; 2002 में मिला था नोबेल शांति पुरस्कार -जिमी कार्टर का भारत से था विशेष लगाव, भारत में हुआ था उनका जन्म

वॉशिंगटन/शिव कुमार यादव/- पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर का रविवार देर रात जॉर्जिया स्थित अपने घर में 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वह अमेरिका 39वें राष्ट्रपति रहे है और अब तक अमेरिकी इतिहास के सबसे ज्यादा जीवित रहने वाले राष्ट्रपति रहे। उन्हे 2002 में नोबेल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उनका भारत से गहरा लगाव था और उनका जन्म भी भारत में ही हुआ था। कार्टर कुछ समय से मेलानोमा बीमारी से पीड़ित थे। यह एक तरह का स्किन कैंसर होता है। यह उनके लिवर और दिमाग तक फैल चुका था। उनके निधन पर विश्व की कई बड़ी हस्तियों ने दुःख जताते हुए अपनी संवेदनाएं व्यक्त की है।      

1 अक्टूबर 1924 को जन्मे कार्टर 1977 से 1981 तक अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति रहे। वे अमेरिकी इतिहास में सबसे ज्यादा जीवित रहने वाले राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद कई साल तक उन्होंने अपनी संस्था ’कार्टर सेंटर’ के जरिए मानवता के काम किए। इसके लिए उन्हें 2002 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था। जिमी कार्टर ने 1 अक्टूबर 2024 को जॉर्जिया में अपने घर के बैकयार्ड में परिवार और दोस्तों की मौजूदगी में 100वां जन्मदिन मनाया था। इस अवसर पर कार्टर के बेटे बोले- मेरे पिता उन सबके लिए हीरो थे, जो प्यार में यकीन करते हैं जिमी कार्टर के बेटे चिप कार्टर ने रॉयटर्स से कहा, ’न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि उन सभी लोगों के लिए हीरो थे, जो शांति, मानवाधिकार और निस्वार्थ प्रेम में विश्वास रखते हैं। जिस तरह से वे लोगों को साथ लाया करते थे, उसकी वजह से आज यह पूरी दुनिया हमारा परिवार है।’

जिमी कार्टर 19 नवंबर 2023 को 96 साल की उम्र में अपनी पत्नी रोजलिन कार्टर के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। व्हीलचेयर पर बैठे कार्टर बेहद कमजोर दिखाई दे रहे थे।

जिमी कार्टर के निधन पर राजनेताओं के बयान…
जो बाइडेनः दुनिया ने असाधारण नेता खो दिया अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि आज अमेरिका और दुनिया ने एक असाधारण नेता, राजनेता और मानवतावादी खो दिया। छह दशक तक हमें जिमी कार्टर को अपना करीबी दोस्त कहने का सम्मान मिला, लेकिन जिमी कार्टर के बारे में असाधारण बात यह है कि अमेरिका और दुनिया भर के लाखों लोग जिन्होंने उनसे कभी मुलाकात नहीं की, वे भी उन्हें अपने करीबी दोस्त जैसा ही मानते थे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जिमी कार्टर के साथ अपनी यह तस्वीर एक्स पर शेयर की।

बराक ओबामाः प्रेसिडेंट कार्टर ने हमें गरिमापूर्ण जीवन का अर्थ समझाया पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जिमी कार्टर के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा- राष्ट्रपति कार्टर ने हम सभी को सिखाया कि गरिमा, न्याय, सेवा और अनुग्रह से भरा जीवन जीने का क्या अर्थ होता है। मिशेल और मैं कार्टर परिवार और उन सभी के प्रति अपनी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं भेजते हैं, जिन्होंने इस बेमिसाल व्यक्ति से प्रेम किया और उनसे सीख ली।

डोनाल्ड ट्रंपः कार्टर ने हमारी जिंदगी सुधारने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाई अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि राष्ट्रपति के तौर पर जिमी कार्टर ने एक अमिट धरोहर छोड़ी है। जिमी उस वक्त राष्ट्रपति रहे जब अमेरिका एक महत्वपूर्ण समय से गुजर रहा था। इस दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का समाना किया और सभी अमेरिकियों का जीवन सुधारने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाई।

हालांकि, मैं उनके विचारों और राजनीतिक दृष्टिकोण से असहमत था, लेकिन मैंने यह भी महसूस किया कि वह असल में हमारे देश और इसके आदर्शों से गहरा प्रेम करते थे। इसके चलते मेरे मन में उनके लिए सम्मान है।

किसान परिवार में पैदा हुए कार्टर अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति बने 20 जनवरी 1977 को देश के 39वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद पेंसिलवेनिया एवेन्यू पर चलते प्रेसिडेंट कार्टर और फर्स्ट लेडी रोजलिन कार्टर। साल 1924 में जिमी कार्टर का जन्म भारत में हुआ था हालांकि वो अमेरिका के जॉर्जिया में उनके माता-पिता एक किसान परिवार से आते थे। 1960 में वो राजनीति में आए और 1971 में पहली बार अपने राज्य के गवर्नर बने। इसके ठीक 6 साल बाद जिमी कार्टर ने रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड को हराया और राष्ट्रपति बने।

अपने कार्यकाल में कार्टर ने कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया। इनमें शीत युद्ध के तनाव, तेल की अस्थिर कीमत और नस्लीय समानता और महिला अधिकारों को लेकर कई अमेरिकी राज्यों में आंदोलन शामिल रहा।

1978 में कैंप डेविड समझौता कराया, मिडिल ईस्ट में शांति बहाल की उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 1978 में कैंप डेविड एकॉर्ड था, जो मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात और इजराइल के प्रधानमंत्री मेनाचेम बेगिन के बीच हुआ ऐतिहासिक शांति समझौता था। इस समझौते से मिडिल ईस्ट में शांति कायम हुई और कार्टर शांति समर्थक नेता के रूप में स्थापित हुए।

हालांकि, अमेरिका में बढ़ती मंदी और कार्टर की घटती लोकप्रियता उनके खिलाफ काम कर रही थी। तभी 1979 में ईरान में हुई क्रांति ने अमेरिकी समर्थक शाह को सत्ता से उखाड़ फेंका। इससे उनके खिलाफ ऐसा माहौल बना जिसकी वजह से 1980 के चुनाव में वे रोनाल्ड रीगन से हार गए।

17 सितंबर 1978 में अमेरिका के मैरीलैंड में कैंप डेविड में मिस्र के राष्ट्रपति और इजराइली च्ड के बीच समझौता हुआ। तस्वीर में बाएं से दाएं- मिस्र के राष्ट्रपति अनवर एल-सदात, अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर और इजराइल के प्रधानमंत्री मेनाचेम बेगिन।

जनता पार्टी की सरकार के दौरान भारत आए थे जिमी कार्टर। जिमी कार्टर भारत के दौरे पर आने वाले अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति थे। वो जनवरी 1978 में तीन दिन के दौरे पर भारत आए थे। जिमी कार्टर का यह दौरा तब हुआ था जब कुछ महीने पहले ही इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में जनता पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली थी और इंदिरा गांधी की हार हुई थी।

जिमी कार्टर के इस दौरे से 1971 में भारत-पाकिस्तान जंग और 1974 में भारत के परमाणु परीक्षण से दोनों देशों के बीच आया तनाव कम हुआ था। बता दें कि कार्टर की मां लिलियन कई महीनों तक भारत में रही थीं। जब कार्टर भारत आए तो वो हरियाणा में गुरुग्राम के एक गांव दौलतपुर नसीराबाद भी गए थे। इसके बाद से उस गांव का नाम कार्टरपुरी रख दिया गया था। 1978 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर भारत दौरे पर आए थे। तस्वीर में उनके साथ भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई हैं। कार्टर चाहते थे भारत परमाणु हथियार हासिल न करे साल 1974 में भारत ने बिना किसी को भनक लगे राजस्थान के पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण किया था। इससे अमेरिका नाराज हो गया था। इसके चलते भारत पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए गए थे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक जब जिमी कार्टर 1978 में भारत आए तो उन्हें पूरा यकीन था कि वो भारत से एनपीटी यानी नॉन प्रोलिफरेशन ट्रीटी पर साइन करवा लेंगे और हमेशा के लिए हमारे परमाणु हथियार हासिल करने का रास्ता बंद करवा देंगे। हालांकि ऐसा नहीं हो पाया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने बड़ी चालाकी से उनके सामने तीन शर्तें रख दीं। उन्होंने कहा कि भारत एनपीटी पर साइन कर देगा अगर दुनिया की सभी परमाणु शक्तियां भी ऐसा कर दें। दूसरी शर्त में उन्होंने कहा कि कोई भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। तीसरी शर्त में उन्होंने कहा कि जितने देशों के पास परमाणु हथियार हैं अगर वो उन्हें खत्म कर देते हैं तो भारत भी कभी कोई परमाणु परीक्षण नहीं करेगा।

यह बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर भारत में ही जन्मे थे। जिमी कार्टर 1 अक्तूबर 1924 को हरियाणा के गुड़गांव जिले में ही जन्मे थे। गुड़गांव शहर से लगभग तीन किलोमीटर दूर एक गांव है चौमाखेड़ा जहां सन् 1924 में एक साधारण से प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में पैदा हुए थे। श्री कार्टर की मां यहीं पर नर्स नियुक्त थीं। हरियाणा की भूमि पर जन्में जिमी नामक बालक ने बड़े होकर दुनिया के एक बड़े देश अमेरिका की बागडौर सम्भाली थी।

कहते हैं जब 1977 में जिमी कार्टर भारत आये थे तो आनन-फानन में इसका नाम बदल कर कार्टर पुरी कर दिया गया था। उस वक्त हरियाणा के मुख्यमंत्री चौधरी देवी लाल थे। अमेरिकी राष्ट्रपति उस समय इस गांव विकास करना चाहते थे लेकिन देवी लाल ने यह आश्वाशन दे कर टाल  दिया था कि इस गांव का विकास हरियाणा सरकार करेगी। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुप्पी साध गए। हालांकि इतिहास में इस गांव के कई बार नाम बदले लेकिन गुड़गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर बसा ऐतिहासिक गांव कार्टर पुरी काफी समय तक बदहाल बना रहा।

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