नोबेल पुरस्कार के लिए भारत ने ट्रंप को नही किया नॉमिनेट 

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नोबेल पुरस्कार के लिए भारत ने ट्रंप को नही किया नॉमिनेट 

-नोबेल पुरस्कार को लेकर हुई थी बहस, चीन के खिलाफ खत्म हो सकता है क्वाड..! -पीएम मोदी से झगड़े के बाद अब क्वाड की मीटिंग में ट्रंप के भारत आने की संभावना कम!

वॉशिंगटन/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के लिए मुहिम चला रहे हैं। लेकिन भारतीय नेता के नॉमिनेट करने से इनकार करने के बाद उनकी मुहिम खटाई में पड़ गई है। हालांकि पाकिस्तान ने उन्हें नॉमिनेट किया है। फिर भी भारत का इनकार उनके दावे को कमजोर कर देता है। जिसे लेकर डोनाल्ड ट्रंप भड़के हुए है और पीएम मोदी को सबक सिखाने के लिए भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है।

बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच टेलीफोन पर हुई बहस के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप का इस साल भारत आने का कोई इरादा नहीं है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवाईटी) ने 12 भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से इसका खुलासा किया है। एनवाईटी ने खुलासा करते हुए कहा है कि 17 जून को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर बात हुई थी। इस दौरान ट्रंप ने पाकिस्तान की तरह भारत को भी उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने को कहा था, जिसे लेकर भारतीय प्रधानमंत्री भड़क गये थे।

एनवाईटी के अनुसार टेलीफोन पर भारतीय नेता ने ट्रंप को दो टूक शब्दों में कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच मई महीने हुए सीजफायर समझौते से अमेरिका और ट्रंप का कोई लेना देना नहीं है। हालांकि टेलीफोन पर ट्रंप ने मोदी को जरूर कहा था कि वो इस साल के अंत में भारत में होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली का दौरा करेंगे, लेकिन अब उनका भारत आने का कोई इरादा नहीं है। ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिए है।

क्या अब क्वाड का कोई भविष्य नहीं है?
एनवाईटी ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के लिए मुहिम चला रहे हैं। लेकिन भारतीय नेता के नॉमिनेट करने से इनकार करने के बाद उनकी मुहिम खटाई में पड़ गई है। हालांकि पाकिस्तान ने उन्हें नॉमिनेट किया है। फिर भी भारत का इनकार उनके दावे को कमजोर कर देता है। इसके बाद ही ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ थोप दिया। अमेरिकी टैरिफ का गंभीर असर भारत की इकोमॉमी पर पड़ने की आशंका है। भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात सालाना करीब 85 बिलियन अरब डॉलर का है। इस पर 50 प्रतिशत टैरिफ़ लगने से भारतीय कंपनियों को अरबों डॉलर का नुकसान होगा। भारत ने फिलहाल इसका जवाब चुप्पी और वैकल्पिक बाजारों की तलाश से दिया है, लेकिन यह साफ है कि रणनीतिक साझेदारी पर अब गंभीर सवाल हैं।

डोनाल्ड ट्रंप अगर भारत नहीं आते हैं तो ना सिर्फ इस साल क्वाड शिखर सम्मेलन स्थगित हो जाएगा, बल्कि क्वाड के भविष्य पर भी गंभीर सवाल उठेंगे। क्वाड में भारत और अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देश भी हैं। क्वाड का गठन 2007 में हुआ था और 2017 में इसे फिर से एक्टिवेट किया गया था। इसका मकसद इंडो-पैसिफिक में चीन की आक्रामकता को काउंटर करना है। लेकिन ट्रंप के टैरिफ ने इसे गहरा आघात पहुंचाया है। मौजूदा हालात देखकर यही लगता है कि क्वाड का भविष्य अब खतरे में है।

ऑस्ट्रेलिया और जापान भी अमेरिका से नाराज
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि ट्रंप की टैरिफ का असर ऑस्ट्रेलिया और जापान पर भी हुआ है। ऑस्ट्रेलिया, क्वाड का एक अहम स्तंभ है, जो पिछले कुछ सालों से चीन की आक्रामक व्यापार नीतियों से परेशान था। लेकिन घरेलू आर्थिक चुनौतियों और मंदी की आशंका ने ऑस्ट्रेलिया को चीन के साथ सुलह करने के लिए मजबूर कर दिया है। हाल के महीनों में ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच 200 अरब डॉलर से ज्यादा के व्यापार सौदे फिर से सक्रिय हुए हैं। ऐसे में कैनबरा का क्वाड पर प्रतिबद्ध रहना अब काफी मुश्किल हो गया है।

जबकि क्वाड का तीसरा अहम सदस्य जापान भी ट्रंप की व्यापारिक नीतियों से खुश नहीं है। हाल ही में अमेरिका ने जापानी ऑटोमोबाइल्स और टेक्नोलॉजी उत्पादों पर 20 फीसदी टैरिफ लगा दिया है, जिससे टोक्यो और वॉशिंगटन के रिश्तों में तनाव आ गया। जापान ने मोदी से टोक्यो दौरे से ठीक पहले अपने व्यापार प्रतिनिधिमंडल का अमेरिका दौरा रोक दिया। वहीं जापान ने भारत के साथ अपने सामरिक रिश्ते और मजबूत करने का फैसला लिया है। टोक्यो ने हाल ही में भारत में 42 अरब डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की घोषणा की है और रक्षा सहयोग को भी नई ऊंचाई पर ले जाने की योजना बनाई है। ऐसे में क्वाड के भविष्य पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

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