नेपाल अशांत: पानीटंकी बॉर्डर से भारतीयों की वापसी

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September 17, 2026

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-नेपाल में हालात बेकाबू, पानीटंकी बॉर्डर से लौटे भारतीय, बोले – “अब जान में जान आई” -हिंसा के बीच भारतीयों की घर वापसी

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     नेपाल में दिनों-दिन बिगड़ती जा रही स्थिति के बीच वहां मौजूद भारतीय नागरिक और पर्यटक सुरक्षित भारत लौटने लगे हैं। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के पानीटंकी बॉर्डर से कई लोग भारत पहुंचे। सीमा पार करते ही उन्होंने राहत की सांस ली और कहा – “अब ऐसा लग रहा है कि जान वापस आ गई।”

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से भड़की अशांति
नेपाल में सरकारी भ्रष्टाचार और पक्षपात के खिलाफ शुरू हुआ ‘जेन-जी आंदोलन’ धीरे-धीरे हिंसक रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की है। आंदोलन के उग्र होने के बाद हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हैं। असम के निवासी कोहिला, जो नेपाल से लौटे हैं, ने कहा कि वहां हड़ताल लंबे समय तक चल सकती है, इसलिए भारत लौटना ही सुरक्षित विकल्प था।

विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी
नेपाल की नाजुक स्थिति को देखते हुए भारत सरकार का विदेश मंत्रालय (MEA) सक्रिय हो गया है। मंत्रालय ने वहां रह रहे भारतीयों को सतर्क रहने और बिना जरूरत घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। बुधवार को भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया।

पीएम का इस्तीफा और राजनीतिक संकट
तेजी से बिगड़ते हालात के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफे की घोषणा कर दी। काठमांडो, पोखरा, बुटवल और बीरगंज समेत कई प्रमुख शहरों में हिंसक प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी बात सुनने के बजाय दमनकारी नीतियों पर उतर आई है।

सोशल मीडिया पर पाबंदी बनी चिंगारी
हिंसा को और भड़काने का बड़ा कारण सरकार का सोशल मीडिया पर प्रतिबंध रहा। फेसबुक, यूट्यूब और अन्य 26 प्लेटफॉर्म्स पर लगे बैन ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया। सरकार ने देर रात पाबंदी हटाई, लेकिन प्रदर्शन थमने के बजाय और ज्यादा उग्र हो गए।

सरकारी इमारतों और नेताओं के घरों पर हमले
राजधानी काठमांडो में हालात सबसे ज्यादा भयावह हैं। कर्फ्यू और भारी सुरक्षा के बावजूद भीड़ ने सिंह दरबार (जहां पीएम और मंत्रियों के दफ्तर हैं) को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा पीएम ओली के जनकपुर और बालकोट स्थित घरों, पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड, कई मंत्रियों और नेताओं के आवासों पर हमला किया गया। कांग्रेस महासचिव गगन थापा का काठमांडो स्थित घर भी आगजनी की चपेट में आ गया।

जान-माल का भारी नुकसान
अब तक की जानकारी के अनुसार, हिंसक झड़पों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालात काबू में रखने के लिए कई इलाकों में सेना तैनात कर दी गई है और कर्फ्यू लगा हुआ है।

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