नजफगढ़ में बायोगैस प्लांट का ट्रायल आज से शुरू,

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 11, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

नजफगढ़ में बायोगैस प्लांट का ट्रायल आज से शुरू,

-ये परेशानियां होंगी दूर, मिलेंगे कई लाभ, 5 महीने बाद पूरी क्षमता के साथ करेगा काम

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/शिव कुमार यादव/- नजफगढ़ के नंगली सकरावती इलाके में आज से निर्माणाधीन बायोगैस प्लांट का ट्रायल शुरू होने जा रहा है। इस प्लांट के शुरू होने से डेयरियों से निकलने वाले गोबर से बायोगैस और जैविक खाद बनाया जाएगा।
                 नजफगढ़ जोन के नंगली सकरावती में निर्माणाधीन बायोगैस प्लांट को गुरुवार से ट्रायल बेस पर शुरू हो जाएगा। पांच महीने बाद ये पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू करेगा। यहां आसपास की 1500 डेयरियों से निकलने वाले गोबर से बायो गैस और जैविक खाद तैयार की जाएगी। मेयर डॉ. शैली ओबरॉय ने बुधवार को बायोगैस प्लांट की साइट पर जाकर इसका निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह प्लांट लैंडफिल साइटों पर पशुओं के गोबर की डंपिंग को कम करेगा। प्लांट में क्षेत्र की करीब 1,500 डेयरियों से रोज निकलने वाले करीब 200 मीट्रिक टन गोबर का इस्तेमाल होगा। गोबर से बायो गैस और जैविक खाद बनेगी और निगम व अन्य सिविक एजेंसियों की देखरेख वाले पार्कों में इस्तेमाल होगी। यहां से निर्मित जैविक खाद आम लोगों के लिए भी उपलब्ध रहेगी।

मेयर डॉ. शैली ओबरॉय ने किया निर्माणाधीन बायोगैस प्लांट का निरीक्षण
मेयर के साथ स्थानीय विधायक गुलाब सिंह ने भी निर्माणाधीन बायोगैस प्लांट का निरीक्षण किया। मेयर ने कहा कि इस प्लांट में गोबर से गैस बनने की शुरुआत बृहस्पतिवार से हो जाएगी। इसे पहले ट्रायल के तौर पर शुरू किया जा रहा है। पांच माह बाद अक्टूबर से पूरी क्षमता के साथ ये काम करेगा। फिर यहां से भारी मात्रा में जैविक खाद का उत्पादन भी होगा।

डेयरी मालिकों और स्थानीय लोगों को मिलेगा लाभ
इस प्लांट के संचालन से डेयरी मालिकों और स्थानीय लोगों को लाभ होगा। इस प्लांट के पूरी क्षमता के साथ शुरू होने से कचरा प्रबंधन के काम में बड़ा योगदान मिलेगा। लैंड फिल साइट पर कचरा कम होगा। डेयरी क्षेत्रों में साफ सफाई बढ़ेगी और नालियों में गोबर नहीं जमा होगा। साथ ही कई प्रकार की बीमारियों से बचाव व पर्यावरण संरक्षण होगा।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox