नजफगढ़-द्वारका में उमड़ी आस्था की गंगा, जब हर घाट बना श्रद्धा का संगम

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 14, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

नजफगढ़-द्वारका में उमड़ी आस्था की गंगा, जब हर घाट बना श्रद्धा का संगम

-डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रती माताओं ने मांगी परिवार की खुशहाली की कामना

नजफगढ़/द्वारका/उमा सक्सेना/-    दिल्ली के नजफगढ़, द्वारका और सैनिक एन्क्लेव में इस बार छठ पूजा का दृश्य देखने लायक रहा। घाटों पर भक्ति, उल्लास और पवित्रता का ऐसा संगम बना कि हर कोई भावविभोर हो उठा।
सूर्यदेव की स्वर्णिम किरणों से नहाए घाटों पर जब व्रती माताओं ने अर्घ्य अर्पित किया, तो वातावरण में छठी मईया के गीतों की गूंज और दीपों की रौशनी ने इस पावन क्षण को अविस्मरणीय बना दिया।

सुबह से ही इलाकों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। नजफगढ़ के विभिन्न मोहल्लों से लेकर द्वारका और सैनिक एन्क्लेव तक हर जगह छठ पर्व की तैयारियों की रौनक नजर आई।
महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, हाथों में दौरा और सूप लिए घाटों तक पहुंचीं। बच्चों और युवाओं ने जगह-जगह सजावट की, दीये जलाए और माहौल को और भी भक्ति से भर दिया।

चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व न केवल सूर्य की उपासना का प्रतीक है, बल्कि यह संयम, पवित्रता और परिवार के प्रति समर्पण का भी संदेश देता है।
व्रती माताएं कठिन निर्जला उपवास रखकर अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि के लिए छठी मईया से प्रार्थना करती हैं।

इस बार नजफगढ़, द्वारका और सैनिक एन्क्लेव में स्थानीय समितियों और निवासियों के सहयोग से घाटों की सफाई, सुरक्षा और सजावट के उत्कृष्ट इंतजाम किए गए।
रात में दीपों से सजे घाटों का दृश्य मानो धरती पर किसी आकाशीय उत्सव जैसा प्रतीत हो रहा था।

लोगों का कहना है कि छठ पूजा दिल्ली के बदलते जीवन में भी आस्था की वह डोर है जो हर समुदाय, हर मोहल्ले और हर परिवार को एक सूत्र में बांध देती है।
यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह समाज में सामूहिकता, अनुशासन और सांस्कृतिक गर्व का भी प्रतीक है।

जब डूबते सूर्य को अंतिम अर्घ्य दिया गया, तो पूरे नजफगढ़, द्वारका और सैनिक एन्क्लेव में ऐसा लगा जैसे हर दिल में नई उम्मीद, नई ऊर्जा और नई रोशनी जन्म ले रही हो।

छठ पूजा का यह पर्व हमें यह सिखाता है कि हर ढलती शाम के बाद एक नई सुबह जरूर आती है।
नजफगढ़, द्वारका और सैनिक एन्क्लेव की यह भक्ति, यह उल्लास और यह आस्था दिल्ली की उस आत्मा का प्रमाण है, जो आज भी अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox