नजफगढ़/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/-“जीते जी रक्तदान और मरणोपरांत नेत्रदान – यही सच्ची मानव सेवा है।“ इस महान सोच को वास्तविकता में बदलने का कार्य नजफगढ़, दिल्ली के निवासी हिमांशु नारंग के परिवार ने किया है।
हिमांशु नारंग, जो कि नजफगढ़ की गली सुनारों वाली में रहते थे और एक दुकानदार थे, का बीती रात आकस्मिक देहावसान हो गया। वे स्वर्गीय अशोक नारंग और स्वर्गीय अनमोल नारंग के पुत्र थे। उनके असामयिक निधन के बाद उनके भाइयों आकाश नारंग और साहिल नारंग, चाचा सुभाष, चाची श्रीमती सारिका और अन्य परिजनों ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए हिमांशु का नेत्रदान कराने का संकल्प लिया।
परिवार ने तुरंत नेत्रदान, रक्तदान और देहदान जैसे मानवीय कार्यों को समर्पित संस्था “आहुति“ से संपर्क किया। संस्था के सक्रिय सदस्य श्री जय गोपाल मिगलानी एवं पंडित शिव शंकर जी ने तत्परता से कार्य करते हुए गुरुग्राम स्थित वाईपीएम निरामया आई बैंक से संपर्क किया। वहां से डॉक्टरों और तकनीशियनों की टीम समय पर पहुंची और हिमांशु नारंग का नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
यह आहुति संस्था द्वारा किया गया 1041 वां नेत्रदान था, जो न केवल दिवंगत हिमांशु के लिए एक श्रद्धांजलि है, बल्कि उन जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए नई रोशनी की उम्मीद भी है, जो अब उनके नेत्रों से दुनिया को देख सकेंगे।


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